जमशेदपुर। लौहनगरी जमशेदपुर में उस वक्त हड़कंप मच गया जब स्वर्णरेखा नदी के किनारे एक विशालकाय बम बरामद हुआ। नदी की रेत में दबे इस बम का वजन लगभग 227 किलोग्राम (500 पाउंड) बताया जा रहा है। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और सेना की टीम ने मौके पर पहुँचकर मोर्चा संभाल लिया है।

कैसे हुआ खुलासा?
जानकारी के अनुसार, नदी का जलस्तर कम होने और मिट्टी के कटाव के कारण यह बम सतह पर दिखाई देने लगा था। स्थानीय लोगों ने जब इस विशाल लोहे की वस्तु को देखा, तो तुरंत पुलिस को सूचित किया। बम की आकृति और आकार को देखते हुए प्रारंभिक जांच में इसे द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के समय का ‘एरियल बम’ माना जा रहा है।
सेना का बम निरोधक दस्ता मौके पर
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राँची से सेना के बम निरोधक दस्ते (Bomb Disposal Squad) को बुलाया गया है। सेना के विशेषज्ञों ने बम के चारों ओर सुरक्षा घेरा बना लिया है।
- सुरक्षा उपाय: पुलिस ने नदी के तटीय इलाकों को खाली करा लिया है और आम लोगों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
- अगला कदम: सेना अब इस बात का आकलन कर रही है कि बम को उसी स्थान पर डिफ्यूज किया जाए या किसी सुरक्षित निर्जन स्थान पर ले जाकर ‘कंट्रोल्ड ब्लास्ट’ के जरिए नष्ट किया जाए।
इतिहास से जुड़ा हो सकता है तार
विशेषज्ञों का कहना है कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जमशेदपुर का उपयोग सैन्य रसद और हवाई गतिविधियों के लिए किया जाता था। संभवतः यह बम उसी दौर का है जो दशकों से नदी की गहराइयों में दबा हुआ था।
प्रशासन की अपील: ज़िला प्रशासन ने शहरवासियों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और सुरक्षा घेरे के पास जाने की कोशिश न करें। सेना की कार्रवाई जारी है और जल्द ही स्थिति को पूरी तरह सुरक्षित कर लिया जाएगा।
