पटना : भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशक कमल कुमार सिंह ने आज जानकारी दी कि भूमि सर्वे के द्वितीय चरण के 18 जिलों में स्वघोषणा देनेवालों की संख्या में इजाफा हुआ है. अबतक 76 लाख से अधिक रैयतों ने ऑफलाइन और ऑनलाइन माध्यम से स्वघोषणा जमा किया है।
कमल कुमार सिंह ने बताया कि इनमें 46 लाख रैयतों ने सीधे सर्वे निदेशालय की वेबसाइट पर ऑनलाइन स्वघोषणा जमा किया है जबकि 24 लाख स्वघोषणा को लोगों नेा शिविरों में जाकर जमा किया जिन्हें सर्वे कर्मियों द्वारा ऑनलाइन किया गया है. करीब 6 लाख स्वघोषणा ऐसे हैं जिन्हें ऑफलाइन मोड मेंविरों में प्राप्त किया गया है लेकिन सर्वर में समस्या के कारण ऑनलाइन नहीं किया जा सका है. जल्द ही इन्हें ऑनलाइन कर दिया जाएगा।
कमल कुमार सिंह ने कि सर्वर में आई दिक्कतों को दूर कर लिया गया है. भागलपुर और पूर्णिया कमिश्नरी के लिए हमने सर्वर अलग कर दिया है. आवेदन देने के लिए हरेक कमिश्नरी के लिए अलग पाथ भी जल्द ही लोगों को बता दिए जाएंगे. 15 फरवरी तक सभी 9 कमिश्नरी के लिए सर्वर अलग-अलग कर दिया जाएगा. फिर डाटा इंट्री और डाटा अपलोडिंग में आनेवाली दिक्कतें समाप्त हो जाएंगी और स्वघोषणा एवं टेरीज लेखन के काम में तेजी आ जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस माह के पहले पखवाड़े में आयोजित बंदोबस्त पदाधिकारियों की मासिक बैठक में विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने स्पष्ट कर दिया था कि फरवरी के अंतिम सप्ताह से दूसरे चरण के सभी अंचलों में किस्तयार का काम भी शुरू कर दिया जाएगा. उन्होंने उससे पहले सभी मौजों में टेरीज लेखन यानि प्रपत्र 5 भरने का निदेश दिया था. फिलहाल सभी गांवों में टेरीज लेखन का काम चल रहा है और 15 फरवरी तक इसके पूरा होने की उम्मीद है।
दूसरे चरण के 18 जिलों के सभी 23,786 गांवों में उद्घोषणा का काम पूरा कर लिया गया है और इन्हें वेबसाइट पर अपलोड भी कर दिया गया है. इसी तरह इन सभी गांवों में ग्राम सभा का आयोजन भी किया जा चुका है. हरेक गांव में आयोजित सभा को कार्यवाही और 2 फोटोग्राफ के साथ निदेशालय की वेबसाइट पर अपलोड किया जा सकता है, जिसे ऑनलाइन देखा भी जा सकता है. इसी प्रकार सर्वे प्रारंभ होने वाले सभी गांवों को आरटूआर साफ्टवेयर से भी जोड़ दिया गया है।
किस्तवार के दौरान सभी गांवों की सीमा का निर्धारण किया जाता है और हरेक गांव के खेसरा या प्लॉट के हवाई फोटोग्राफी से तैयार नक्का जमीन से मिलान किया जाता है. जब किस्तवार का काम पूरा हो जाता है तो हरेक खेत यानि खेसरा में नया नंबर दिया जाता है. फिर खानापुरी का काम किया जाता है जिसमें हरेक खेसरा के स्वामित्व का. निर्धारण किया जाता है।
जिन जिलों में दूसरे चरण में सर्वे का प्रारंभ किया गया है उनके नाम हैं:- पटना, बक्सर, भोजपुर, कैमूर, गया, नवादा, वैली, औरंगाबाद, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, भागलपुर, गोपालगंज, सीवान, सारण, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर और रोहतास।
उल्लेखनीय है कि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री डॉ दिलीप कुमार जायसवाल ने स्वघोषणा की संख्या बढ़ाए जाने की जरूरत पर बल दिया है. उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय सर्वे कर्मी वि पेशकर अमीन घर-घर जाकर प्रपत्र-2 और प्रपत्र-3-1 भरने के लिए लोगों को प्रेरित करें. स्वघोषणा के जरिए जमीन के कागजात जमा रहेंगे तो खानापुरी में खेसरा पंजी बनाने में सर्वे कर्मियों को परेशानी नहीं होगी।