जमशेदपुर : झारखंड सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्ती दिखाते हुए 78 स्कूलों को नोटिस जारी किया है। राज्य के शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों से तीन साल का रिकॉर्ड और अवैध रूप से वसूले गए शुल्क का हिसाब मांगा है। सरकार ने साफ कर दिया है कि निर्धारित समय के भीतर संतोषजनक जवाब न मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मनमानी वसूली पर रोक
शिक्षा विभाग के निर्देशों को नजरअंदाज कर कई निजी स्कूल अभिभावकों से मनमाने तरीके से फीस वसूल रहे थे। कई मामलों में स्कूलों द्वारा छात्रों को विशेष दुकानों से किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य सामग्रियों की खरीददारी के लिए बाध्य किया जा रहा था। सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए इन स्कूलों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
तीन साल का रिकॉर्ड तलब
पूर्वी सिंहभूम जिले के जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) और जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) की ओर से इन स्कूलों को नोटिस भेजा गया है। इनसे फीस वृद्धि का तीन साल का पूरा रिकॉर्ड मांगा गया है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि क्या वे झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम 2017 के तहत निर्धारित नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं।
फीस वृद्धि पर सरकार की नजर
शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन ने स्पष्ट किया कि कई स्कूलों में नियमों की अनदेखी कर हर साल फीस बढ़ाई जा रही है। अधिनियम 2017 के नियम-7अ (1) (छ) के तहत, किसी भी स्कूल को दो वर्षों में अधिकतम 10% फीस वृद्धि की अनुमति है। यदि इससे अधिक वृद्धि करनी हो तो उसे संबंधित समिति से अनुमोदन लेना आवश्यक होता है। लेकिन, कई स्कूल इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं।
भौतिक सत्यापन और ऑडिट होगी अनिवार्य
सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इन स्कूलों का भौतिक सत्यापन किया जाएगा और उनके वित्तीय रिकॉर्ड का ऑडिट किया जाएगा। यदि किसी स्कूल द्वारा गलत जानकारी दी गई या नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
3 अप्रैल तक देना होगा जवाब
शिक्षा विभाग ने सभी 78 स्कूलों को 3 अप्रैल तक अपना जवाब देने का निर्देश दिया है। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो संबंधित स्कूलों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे। सरकार की इस सख्ती से राज्य के अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है।