- फाइलों में सफाई, जमीनी हकीकत में जहरीली नदी
- प्रशासन की लापरवाही से बेजुबानों की सामूहिक मौत
जमशेदपुर : जीवनरेखा कही जाने वाली स्वर्णरेखा नदी अब खुद जिंदगी के लिए जंग लड़ रही है। बाबूडीह लाल भट्ठा इलाके में बुधवार को नदी किनारे हजारों मछलियों के मृत मिलने से सनसनी फैल गई। पानी की सतह पर तैरती मछलियां और किनारे पर लगे ढेर ने पूरे इलाके को बदबू से भर दिया, जिससे स्थानीय लोगों का रहना मुश्किल हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस सामूहिक मौत की वजह पानी में ऑक्सीजन की भारी कमी यानी हाइपोक्सिया है। औद्योगिक कचरा और सीवरेज के सीधे नदी में गिरने से बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड बढ़ गई, जिससे जलीय जीवों का दम घुट गया।

चौंकाने वाली बात यह है कि 2010 से नदी को साफ करने की योजनाएं फाइलों में ही दबी हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि फैक्ट्रियों का जहरीला पानी बिना ट्रीटमेंट सीधे नदी में छोड़ा जा रहा है। यह घटना प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोलती है और आने वाले बड़े पर्यावरणीय संकट का संकेत देती है।
