चाकुलिया/धालभूमगढ़ : कोल्हान क्षेत्र के निवासियों के लिए हवाई सफर का सपना अब चाकुलिया के रास्ते सच होता दिख रहा है। शनिवार को भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) की एक उच्चस्तरीय टीम ने पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया और धालभूमगढ़ एरोड्रम का सघन निरीक्षण किया। इस दौरे के बाद यह संकेत मिल रहे हैं कि धालभूमगढ़ में जारी तकनीकी बाधाओं के बीच चाकुलिया एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।


डीजीएम के नेतृत्व में तकनीकी जांच
AAI के डीजीएम (एटीएम) अजय कुमार सिंह के नेतृत्व में आई पांच सदस्यीय टीम ने चाकुलिया के अंचलाधिकारी (CO) नवीन पुरती के साथ मुख्य रनवे और उपलब्ध भूमि का जायजा लिया। अधिकारियों ने मौके पर नक्शों का मिलान किया और निम्नलिखित पहलुओं पर डेटा जुटाया:
- भूमि की उपलब्धता: वर्तमान में उपलब्ध 514 एकड़ जमीन का भौतिक सत्यापन।
- मालिकाना हक: जमीन के दस्तावेज और अंचल कार्यालय के रिकॉर्ड की समीक्षा।
- तकनीकी चुनौतियां: विमान संचालन में आने वाली संभावित बाधाओं का आकलन।
धालभूमगढ़ बनाम चाकुलिया: क्यों बदला फोकस?
धालभूमगढ़ एयरपोर्ट का शिलान्यास लगभग 7 साल पहले बड़े उत्साह के साथ किया गया था, लेकिन यह प्रोजेक्ट अब तक जमीन पर नहीं उतर सका है। इसके मुख्य कारण हैं:
- एलिफेंट कॉरिडोर: वन क्षेत्र और हाथियों के आवागमन का मार्ग होना।
- वन भूमि विवाद: पर्यावरण मंत्रालय से क्लियरेंस मिलने में देरी।
- धार्मिक स्थल: प्रस्तावित भूमि पर स्थित उपासना स्थलों से जुड़ी अड़चनें।
इन बाधाओं को देखते हुए चाकुलिया का 514 एकड़ में फैला विशाल एरोड्रम अब प्रशासन और एयरपोर्ट अथॉरिटी की पहली पसंद बनता दिख रहा है।
लक्ष्य 2036: हवाई कनेक्टिविटी में आएगा सुधार
यह निरीक्षण केंद्र सरकार की उस महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है, जिसके तहत वर्ष 2036 तक देश में 100 नए एयरपोर्ट विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए पुराने और द्वितीय विश्व युद्ध के समय के एरोड्रम्स को पुनर्जीवित किया जा रहा है।
निष्कर्ष :
यदि चाकुलिया को हरी झंडी मिलती है, तो यह न केवल जमशेदपुर बल्कि पश्चिम बंगाल और ओडिशा की सीमा से सटे इलाकों के लिए भी गेम-चेंजर साबित होगा। औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसर खुलने की उम्मीद में क्षेत्र के लोगों की नजरें अब AAI की फाइनल रिपोर्ट पर टिकी हैं।
