रांची : झारखंड में सरकारी खजाने (ट्रेजरी) से वेतन के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। बोकारो और हजारीबाग में सामने आए ‘वेतन घोटाले’ की आंच अब राज्य के 12 अन्य जिलों तक पहुँच गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए वित्त विभाग ने अब कुल 14 जिलों में उच्चस्तरीय जांच कराने का निर्णय लिया है।



मुख्यमंत्री की अनुमति का इंतज़ार
वित्त विभाग ने इस संबंध में एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को भेज दिया है। मुख्यमंत्री की हरी झंडी मिलते ही एक विशेष जांच समिति (SIT) सभी चिन्हित जिलों के कोषागारों में दस्तावेज़ों और डिजिटल ट्रांजेक्शन को खंगालना शुरू कर देगी।
कैसे हुआ खुलासा?
बता दें कि सबसे पहले बोकारो और हजारीबाग के ट्रेजरी में वेतन निकासी के दौरान भारी गड़बड़ी पाई गई थी। शुरुआती ऑडिट में यह संकेत मिले कि कई फर्जी नामों पर या एक ही व्यक्ति के नाम पर अलग-अलग खातों में वेतन भेजा गया है। इसके बाद विभाग को अंदेशा है कि यह खेल पूरे राज्य में एक संगठित नेटवर्क के जरिए चल रहा है।
जांच के दायरे में ये बिंदु:
- डिजिटल हेराफेरी : ट्रेजरी के सॉफ़्टवेयर में सेंधमारी की संभावना की जांच।
- फर्जी कर्मचारी : क्या बिना नियुक्ति के ही वेतन की निकासी की जा रही थी?
- मिलीभगत : कोषागार अधिकारियों और बैंक कर्मियों की भूमिका की भी जांच होगी।
झारखंड सरकार के इस कड़े रुख से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। माना जा रहा है कि जांच शुरू होते ही कई बड़े नामों का खुलासा हो सकता है।
