सिलीगुड़ी : पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में आयोजित नौवें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में उस समय राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सार्वजनिक मंच से ममता सरकार के रवैये पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। राष्ट्रपति के इस रुख के बाद केंद्र सरकार के शीर्ष नेतृत्व—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने भी राज्य सरकार के प्रति कड़ा ऐतराज जताया है।
मुख्य घटनाक्रम: ‘छोटी बहन’ कहकर किया संबोधित
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ‘छोटी बहन’ बताया। हालांकि, उन्होंने भावुक लहजे के साथ-साथ कूटनीतिक स्पष्टता का भी परिचय दिया। उन्होंने संकेत दिया कि राज्य सरकार का व्यवहार और प्रोटोकॉल के प्रति उनका नजरिया संतोषजनक नहीं रहा है, जिससे उन्हें ठेस पहुँची है।
नाराजगी के प्रमुख कारण
माना जा रहा है कि राष्ट्रपति की नाराजगी के पीछे निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:
- प्रोटोकॉल की अनदेखी: राष्ट्रपति के दौरे और कार्यक्रमों के दौरान राज्य सरकार के प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति या समन्वय की कमी।
- विकास कार्यों पर मतभेद: केंद्र और राज्य के बीच चल रही तनातनी का असर राष्ट्रपति के कार्यक्रमों के आयोजन पर भी दिखा।
- आदिवासी सम्मेलनों में राजनीति: संथाल सम्मेलन जैसे सांस्कृतिक और सामाजिक मंच पर राजनीतिक असहयोग को राष्ट्रपति ने गंभीरता से लिया है।
केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया
- दिल्ली के गलियारों में भी इस बयान की गूंज सुनाई दी। सूत्रों के अनुसार:
- पीएम मोदी ने राष्ट्रपति की गरिमा और संवैधानिक मर्यादा का हवाला देते हुए राज्य सरकार के व्यवहार को “अशोभनीय” करार दिया है।
- गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस मुद्दे पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद के प्रति सम्मान बनाए रखना हर राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।
राजनीतिक प्रभाव
आगामी चुनावों और बंगाल की राजनीति के लिहाज से यह घटना काफी महत्वपूर्ण है। आदिवासी समाज के बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का गहरा प्रभाव है, और इस सम्मेलन में उनके द्वारा जताई गई नाराजगी बंगाल सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।
