हजारीबाग : जहाँ एक ओर पूरा देश शक्ति की उपासना और नारी वंदन के पर्व ‘नवरात्र’ में लीन है, वहीं झारखंड के हजारीबाग से मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक बेहद खौफनाक वारदात सामने आई है। यहाँ एक मासूम के साथ हुई बर्बरता ने न केवल निर्भया कांड की यादें ताजा कर दी हैं, बल्कि समाज और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।

वारदात की भयावहता: रूह काँप जाए ऐसी नृशंसता
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अपराधियों ने इस घिनौनी वारदात को अंजाम देते समय क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। पीड़ित के साथ की गई दरिंदगी इतनी डरावनी है कि इसकी तुलना देश को झकझोर देने वाले ‘निर्भया’ कांड से की जा रही है। घटना के बाद से पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा है और लोगों के मन में भारी आक्रोश व्याप्त है।
नवरात्र में कलंकित हुआ समाज
यह घटना उस समय हुई है जब घर-घर में कन्या पूजन और देवी आराधना की जा रही है। एक तरफ हम नारी को ‘शक्ति’ का रूप मानकर पूजते हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसी राक्षसी प्रवृत्ति के लोग मासूमों की जिंदगी तबाह कर रहे हैं। इस घटना ने पूरे झारखंड को राष्ट्रीय स्तर पर शर्मसार कर दिया है।
मुख्य बिंदु:
- अपराधियों का बढ़ता दुस्साहस: नवरात्र जैसे भीड़भाड़ और सुरक्षा वाले समय में ऐसी घटना होना पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी पर बड़ा सवाल है।
- जनता में भारी आक्रोश: स्थानीय लोगों ने दोषियों को तत्काल गिरफ्तार कर फाँसी की सजा देने की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
- प्रशासनिक सुस्ती: घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी ठोस कार्रवाई न होने से लोग सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
न्याय की गुहार
पीड़ित परिवार इस समय असहनीय पीड़ा और सदमे में है। पूरा राज्य अब एक ही सुर में न्याय की मांग कर रहा है। बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस मामले की सुनवाई ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’ में होनी चाहिए ताकि अपराधियों को ऐसी सजा मिले जो भविष्य के लिए एक नजीर बन सके।
“क्या हमारी बेटियाँ अपने ही घर और मोहल्ले में सुरक्षित नहीं हैं? प्रशासन को अब कड़े कदम उठाने ही होंगे, वरना ‘बेटी बचाओ’ का नारा सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगा।”
