रांची : झारखंड विधानसभा में आज पेश हुई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने राज्य के छोटे खनिज (माइनर मिनरल) क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक अवैध बालू और गिट्टी की ढुलाई की वजह से राज्य सरकार को सिर्फ चार साल में ही सैकड़ों करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।मुख्य खुलासे:2017-18 में छोटे खनिज से 1,082 करोड़ रुपए का राजस्व मिला था, जो 2021-22 में घटकर मात्र 698 करोड़ रह गया।सबसे बड़ा खेल बिना नंबर प्लेट और बिना ट्रैकिंग के 72,449 वाहनों से हो रहा है, जिनके जरिए अवैध बालू-गिट्टी की ढुलाई की जा रही है।कई बालू घाट पूरी तरह बंद पड़े हैं, जिससे सरकार को 71 करोड़ रुपए का संभावित नुकसान हुआ। अधिक खनन पर लगने वाले 205 करोड़ रुपए के जुर्माने तक वसूले नहीं गए।

पर्यावरण नियमों की भी जमकर धज्जियां उड़ीं: जाँच किए गए जिलों में 75,000 पेड़ लगाने थे, लेकिन सिर्फ 2,225 पेड़ ही लगाए गए।CAG ने साफ कहा है कि वाहनों पर जीपीएस ट्रैकिंग अनिवार्य करने, घाटों को चालू करने, जुर्माना वसूली करने और पर्यावरण मापदंडों को सख्ती से लागू करने की जरूरत है।
राज्य सरकार ने रिपोर्ट पर तुरंत कार्रवाई का भरोसा दिया है:
खनन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अवैध ढुलाई रोकने के लिए जल्द ही सभी वाहनों पर जीपीएस लगाना अनिवार्य किया जाएगा और बंद पड़े घाटों को फिर से शुरू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।बहरहाल, यह रिपोर्ट झारखंड में लंबे समय से चल रहे बालू माफिया के खेल पर एक और बड़ा सवालिया निशान लगा रही है।
