रांची : झारखंड में रामनवमी जुलूस के दौरान डीजे (DJ) बजाने पर लगे प्रतिबंध को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। इस विवाद के बीच राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने एक बड़ा बयान देते हुए घोषणा की है कि वे खुद रामनवमी उत्सव में शामिल होंगे, लेकिन बिना डीजे के।

प्रमुख बिंदु: मंत्री के बयान की बड़ी बातें
- सद्भावना का संदेश: डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि वे हजारीबाग, रामगढ़ और कोडरमा में आयोजित होने वाले रामनवमी जुलूसों में हिस्सा लेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे “बिना डीजे वाले जुलूस” में शामिल होकर एकता का परिचय देंगे।
- चिकित्सकीय आधार पर विरोध: एक पेशेवर डॉक्टर होने के नाते मंत्री ने डीजे के खतरों पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “डीजे की तेज आवाज स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। जामताड़ा में डीजे के शोर से एक व्यक्ति की जान जा चुकी है, हमें ऐसी घटनाओं से सबक लेना चाहिए।”
- भाजपा पर निशाना: विधानसभा में भाजपा द्वारा डीजे की मांग को लेकर किए जा रहे विरोध पर उन्होंने पलटवार किया। उन्होंने इसे “तुष्टिकरण” के बजाय “जनस्वास्थ्य और सुरक्षा” का मुद्दा बताया।
विधानसभा में हंगामा: ‘श्रद्धा बनाम सुरक्षा’
- झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान भाजपा विधायकों ने डीजे पर प्रतिबंध को ‘हिंदू आस्था पर प्रहार’ बताते हुए सदन के अंदर और बाहर जोरदार प्रदर्शन किया।
- विपक्ष का तर्क: भाजपा विधायकों (जैसे नवीन जायसवाल और प्रदीप प्रसाद) का कहना है कि हजारीबाग की विश्वप्रसिद्ध रामनवमी में डीजे एक परंपरा बन चुका है और इस पर रोक लगाना अनुचित है।
- सरकार का पक्ष: सरकार और संसदीय कार्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के ध्वनि प्रदूषण मानकों और सुरक्षा कारणों से लगाया गया है।
स्वास्थ्य पर असर (डॉक्टरों की सलाह)
स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, 100 dB से अधिक की ध्वनि का प्रभाव निम्नलिखित समस्याएं पैदा कर सकता है:
- Noise-Induced Hearing Loss (NIHL): कानों के पर्दों को स्थायी नुकसान।
- Cardiovascular Stress: हृदय की धड़कन का अनियमित होना।
- Panic Attack: बुजुर्गों और बच्चों में घबराहट की समस्या।
निष्कर्ष: जहाँ भाजपा इस मुद्दे को लेकर सड़क से सदन तक आक्रामक है, वहीं डॉ. इरफान अंसारी ने इसे व्यक्तिगत और चिकित्सकीय मोड़ देकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि रामनवमी के दिन प्रशासन इन प्रतिबंधों को कितनी सख्ती से लागू कर पाता है।
