नई दिल्ली : देश में नए जीएसटी रेट लागू हो चुके हैं. जिन दवाओं पर अब तक 12 फीसदी टैक्स लगता था, उन पर अब केवल 5 फीसदी जीएसटी लिया जाएगा. वहीं, 36 अहम जीवन रक्षक दवाओं को पूरी तरह से टैक्स फ्री कर दिया गया है. इस बदलाव से मध्यम वर्गीय परिवारों से लेकर लॉन्ग-टर्म बीमारियों से जूझ रहे मरीजों और बुजुर्गों तक सभी को सीधा फायदा होगा. इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस (IPA) का कहना है कि इस सुधार से इलाज की लागत में भारी कमी आएगी और डायबिटीज से लेकर फैटी लीवर जैसी बीमारियों का इलाज तकरीबन 2 लाख रुपए तक सस्ता हो सकता है.
हेल्थ सेक्टर को मिलेगा बड़ा लाभ
टैक्स कटौती का सबसे बड़ा असर दवाओं की कीमतों पर पड़ेगा. ओवरऑल टैक्स कम होने से जरूरी दवाएं सस्ती होंगी, जिससे हेल्थ सर्विस सेक्टर को मजबूती मिलेगी. IPA का मानना है कि इस नए स्ट्रक्चर से जटिल और जरूरी जेनेरिक दवाओं के लोकल प्रोडक्शन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे भारत का फार्मा इंडस्ट्री बेस मजबूत होगा और इंपोर्ट पर निर्भरता घटेगी.
कैंसर और रेयर बीमारियों के मरीजों को राहत
IPA ने बताया कि जीएसटी रेट में कटौती का सबसे ज्यादा फायदा कैंसर, जेनेटिक डिस्ऑर्डर और रेयर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को होगा. भारत में अनुमान है कि करीब 72.6 मिलियन लोग रेयर बीमारियों से पीड़ित हैं, जिनके इलाज का खर्च बहुत ज्यादा होता है.
एक उदाहरण देते हुए IPA ने बताया कि 19 वर्षीय रोहन नाम का मरीज फैब्री रोग से पीड़ित है. उसकी एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी पर पहले हर साल 1.8 करोड़ रुपए खर्च होते थे. अब जीएसटी जीरो होने से उसका परिवार हर साल लगभग 20 लाख रुपए बचा पाएगा.
ब्रेस्ट कैंसर मरीजों को 4 लाख की राहत
एचईआर2-पॉजिटिव प्राइमरी ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में पर्टुज़ुमैब और ट्रैस्टुज़ुमैब जैसी महंगी दवाएं लगती हैं. IPA के अनुसार, जीएसटी में 5 फीसदी कटौती के बाद इन दवाओं का खर्च करीब 4 लाख रुपए तक कम हो सकता है. दवाओं, लैब टेस्ट और डायग्नोस्टिक पर आने वाला अतिरिक्त बोझ भी इससे कम होगा.
डायबिटीज, हाई बीपी और अस्थमा मरीजों को भी फायदा
लंबे समय से डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों से जूझ रहे मरीज, जिन्हें रोजाना दवा और इंसुलिन की जरूरत होती है, उन्हें सालाना लगभग 6,000 रुपए की बचत होगी. वहीं अस्थमा और सीओपीडी मरीजों के लिए इनहेलर का खर्च भी कम हो जाएगा. IPA की स्टडी में सामने आया कि ऐसे मरीज सालाना करीब 37,620 रुपए इनहेलर पर खर्च करते थे. अब नए जीएसटी रेट से उन्हें सालाना करीब 2,351 रुपए की राहत मिलेगी.
मोटापे के मरीजों को 2 लाख रुपए तक की राहत
मोटापे से जूझ रहे मरीजों के लिए भी इलाज की लागत घटेगी. अब तक मोटापे की दवाओं और टेस्ट पर सालाना करीब 9 लाख रुपए तक खर्च होता था. जीएसटी रेट में कटौती के बाद यह खर्च लगभग 2 लाख रुपए कम हो जाएगा.
स्पेशलिस्ट्स का मानना है कि इस कदम से न सिर्फ मरीजों को आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि देश का हेल्थकेयर सिस्टम भी और मजबूत होगा. लोकल प्रोडक्शन को बढ़ावा मिलने से भविष्य में दवाओं की उपलब्धता और कीमतों पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा.
