नई दिल्ली/जमशेदपुर : टेल्को टाउन की मिट्टी से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक मंच पर अपनी अलग पहचान बनाने वाले श्रेयांश अंकित ने एक बार फिर जमशेदपुर का नाम रोशन किया है। उनकी तीसरी साहित्यिक कृति “The Weight of Forgotten Things” हाल ही में नई दिल्ली के विश्व पुस्तक मेले में लॉन्च हुई, जहाँ इसे पाठकों और साहित्यप्रेमियों से उत्साहजनक सराहना मिल रही है।

















































परिपक्व लेखनी की ओर एक और कदम…..
विद्या भारती चिन्मय विद्यालय, टेल्को के पूर्व छात्र श्रेयांश अंकित इससे पहले “Seven Lives” और “Search for the Brahmastra” जैसे चर्चित उपन्यास लिख चुके हैं। तीसरे उपन्यास में उनकी लेखनी और अधिक गहराई, संवेदनशीलता और परिपक्वता के साथ सामने आई है, जो उन्हें समकालीन युवा लेखकों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा करती है।
स्मृतियों और विस्मृति के बोझ की कथा…..
“The Weight of Forgotten Things” स्मृति, विस्मृति और अतीत के बोझ पर आधारित एक रहस्यमय व भावनात्मक कहानी है। उपन्यास का नायक रवि भारत के भूले-बिसरे कस्बों में भटकता है, जहाँ लोग उसे बिना पहचाने भी पहचानते प्रतीत होते हैं। पतंगे, दबी हुई यादें, रहस्यमयी स्थान और अनकही सच्चाइयाँ—यह कथा बताती है कि जिन बातों को हम भूल जाना चाहते हैं, वही सबसे गहरे रूप में हमारे जीवन में लौटती हैं।
शिक्षा और पेशेवर जीवन…..
शिक्षा के क्षेत्र में भी श्रेयांश अंकित की उपलब्धियाँ उल्लेखनीय हैं। वे IIM अहमदाबाद के पूर्व छात्र हैं और वर्तमान में IIMA Endowment Fund में Associate Vice President के रूप में कार्यरत हैं। सार्वजनिक नीति, बीमा और परोपकार जैसे क्षेत्रों में उनका अनुभव उनकी रचनाओं में सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनाओं के रूप में स्पष्ट झलकता है।





