नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में भारत के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) और ग्रामीण विकास की दिशा में कई बड़े क्रांतिकारी फैसले लिए गए। सरकार ने कुल ₹8.80 लाख करोड़ की लागत वाली 6 प्रमुख परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिसमें जल जीवन मिशन का विस्तार और नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की घोषणा शामिल है।



1. जल जीवन मिशन 2.0: अब हर घर तक पहुँचेगा ‘स्मार्ट’ पानी
- कैबिनेट ने जल जीवन मिशन (JJM) के दूसरे चरण को मंजूरी दे दी है।
- समय सीमा: इसे दिसंबर 2024 से बढ़ाकर अब दिसंबर 2028 तक कर दिया गया है।
- बजट: इसकी कुल लागत बढ़ाकर ₹8.69 लाख करोड़ कर दी गई है।
खासियत: मिशन का फोकस अब सिर्फ पाइप बिछाने पर नहीं, बल्कि ‘सर्विस डिलीवरी’ और पानी की गुणवत्ता पर होगा। इसके लिए ‘सुजलम भारत’ नाम का एक डिजिटल फ्रेमवर्क और हर गांव के लिए एक यूनिक ‘सुजल गांव आईडी’ शुरू की जाएगी।
2. मदुरै एयरपोर्ट अब हुआ ‘इंटरनेशनल’
तमिलनाडु के ऐतिहासिक शहर मदुरै के हवाई अड्डे को अब आधिकारिक तौर पर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (International Airport) घोषित कर दिया गया है।
- इससे दक्षिण तमिलनाडु में पर्यटन और व्यापार, विशेषकर कपड़ा और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी।
- यह राज्य का तीसरा प्रमुख अंतरराष्ट्रीय द्वार बनेगा।
3. रेलवे कनेक्टिविटी: पश्चिम बंगाल और झारखंड को सौगात
रेलवे नेटवर्क को आधुनिक बनाने के लिए ₹4,474 करोड़ की दो बड़ी मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी मिली है:
- संतरागाछी–खड़गपुर (133 किमी): चौथी लाइन का निर्माण।
- सैंथिया–पाकुड़ (81 किमी): चौथी लाइन का निर्माण।
फायदा: इससे कोयला और सीमेंट जैसी आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई तेज होगी और करीब 5,600 गांवों के 1.47 करोड़ लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।
4. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट कनेक्टिविटी
- इंफ्रास्ट्रक्चर को रफ्तार देने के लिए दो और बड़े सड़क प्रोजेक्ट्स पर मुहर लगी:
- जेवर एयरपोर्ट: नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए ₹3,630 करोड़ की ग्रीनफील्ड कनेक्टिविटी को मंजूरी।
- मध्य प्रदेश हाईवे: मध्य प्रदेश में एनएच-752डी (बदनावर-पेटलावद-थांदला) को 4-लेन बनाने के लिए ₹3,839 करोड़ आवंटित किए गए।
5. सीमावर्ती देशों से निवेश के नियमों में बदलाव
कैबिनेट ने उन देशों से आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नियमों में ढील दी है जिनकी सीमा भारत से लगती है। अब क्रिटिकल सेक्टर (जैसे इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और सोलर सेल) में निवेश के प्रस्तावों पर 60 दिनों के भीतर फैसला लेना अनिवार्य होगा, जिससे ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा मिलेगा।
“इन फैसलों से न केवल देश की कनेक्टिविटी सुधरेगी, बल्कि जल जीवन मिशन 2.0 के जरिए ग्रामीण भारत के जीवन स्तर में बड़ा बदलाव आएगा।” > — अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय मंत्री
