“संजयनगर के गुप्त ठिकाने से संचालित हो रहा संगठित नेटवर्क, रेलवे क्वार्टर और स्टेशन रोड तक फैला सप्लाई सिस्टम”
जमशेदपुर : शहर को नशामुक्त बनाने के तमाम दावों के बीच बागबेड़ा इलाके से एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। एक बड़े स्टिंग ऑपरेशन में ऐसे संगठित ड्रग्स नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जो न केवल गांजा और ब्राउन शुगर की पैकिंग कर रहा है, बल्कि शहर के विभिन्न इलाकों तक इसकी सप्लाई का पूरा तंत्र भी चला रहा है। आरोप है कि बाबूलाल यादव और राधे यादव के घर के समीप स्थित एक पुराने मकान को नशे के कारोबार का अड्डा बना दिया गया है।



जानकारी के अनुसार इस अवैध कारोबार की जड़ें सीधे ओडिशा से जुड़ी हैं। वहां से ट्रांसपोर्ट के माध्यम से नशीले पदार्थों की बड़ी खेप जमशेदपुर लाई जाती है और सबसे पहले संजयनगर स्थित एक गुप्त ठिकाने पर उतारी जाती है। इसके बाद करीब 10 मजदूरों की मदद से गांजा और ब्राउन शुगर को छोटी-छोटी पुड़ियों में पैक कर बाजार के लिए तैयार किया जाता है।
स्टिंग के दौरान मौके पर इलेक्ट्रॉनिक वजन मशीन से 10 से 25 ग्राम तक की पुड़ियां तैयार करते मजदूर दिखाई दिए। वहीं दर्जनों तैयार पैकेट बड़े झोलों में भरकर सप्लाई के लिए रखे गए थे। बताया जाता है कि पैकिंग का काम पूरा होते ही इन्हें मोटरसाइकिल और स्कूटी सवार पेडलरों के हवाले कर दिया जाता है, जो शहर के विभिन्न मोहल्लों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों तक इसकी डिलीवरी करते हैं।
100 रुपये से शुरू होता है नशे का कारोबार……
सूत्रों के मुताबिक नशीले पदार्थों की दरें भी तय हैं। पांच ग्राम गांजा 100 रुपये, 25 ग्राम गांजा 500 रुपये, जबकि एक किलो गांजा 10 से 12 हजार रुपये तक बेचा जाता है। वहीं ब्राउन शुगर की एक पुड़िया 200 रुपये में ग्राहकों तक पहुंचाई जाती है।
पेड़ों पर टांगे जाते हैं नशे से भरे झोले…….
जांच में सप्लाई का एक बेहद हैरान करने वाला तरीका भी सामने आया है। तैयार पैकेटों से भरे झोलों को रेलवे क्वार्टर और स्टेशन रोड क्षेत्र के पेड़ों पर टांग दिया जाता है। इसके बाद पेडलर आसपास की गलियों में घूमते रहते हैं और जरूरत पड़ने पर ग्राहकों तक माल पहुंचाते हैं। इस व्यवस्था का मकसद पुलिस की नजरों से बचना और सीधे सबूतों को छिपाना बताया जा रहा है।
पुलिस को मिली शिकायत, बढ़ेगी निगरानी…….
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सिटी एसपी ललित मीणा ने कहा कि बागबेड़ा और संजयनगर क्षेत्र में नशीले पदार्थों की बिक्री की शिकायतें संज्ञान में आई हैं। पूरे नेटवर्क के संबंध में गुप्त रूप से जानकारी जुटाई जा रही है। स्टेशन रोड और रेलवे क्वार्टर क्षेत्र में पुलिस गश्त बढ़ाई जाएगी तथा इस अवैध कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
नशे के सौदागरों का जाल कितना बड़ा?…….
बागबेड़ा और आसपास के इलाकों में सामने आई यह तस्वीर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। आखिर किसके संरक्षण में नशे का यह कारोबार फल-फूल रहा है? ओडिशा से आने वाली खेप शहर तक कैसे पहुंच रही है? और सबसे बड़ा सवाल—क्या इस नेटवर्क की जड़ें सिर्फ बागबेड़ा तक सीमित हैं या पूरे शहर में इसका जाल फैला हुआ है? अब सबकी नजर पुलिस कार्रवाई पर टिकी है।



