जमशेदपुर : शहर के सोनारी मरीन ड्राइव रोड स्थित एक होटल में आयोजित विवाह समारोह के दौरान बड़ी संख्या में मेहमानों के बीमार पड़ने के मामले में जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा की गई जांच में होटल के जल स्रोतों से लिए गए नमूनों में ई-कोलाई और एंटेरोकोकस फीकैलिस जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं।



जांच रिपोर्ट के अनुसार आरओ सिस्टम से पहले लिए गए पानी के नमूने में 48 घंटे के इन्क्यूबेशन के बाद ई-कोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि हुई। वहीं आरओ से शुद्ध किए गए पानी में भी ई-कोलाई की मौजूदगी पाई गई, जिससे जल शुद्धिकरण प्रणाली की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो गए हैं। इसके अलावा होटल में उपलब्ध कराए जा रहे मिनरल वाटर के नमूने में एंटेरोकोकस फीकैलिस बैक्टीरिया भी पाया गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ई-कोलाई और एंटेरोकोकस फीकैलिस दोनों ही बैक्टीरिया मलजनित प्रदूषण के संकेत माने जाते हैं। इनके सेवन से दस्त, उल्टी, पेट दर्द, बुखार तथा आंतों से संबंधित गंभीर संक्रमण हो सकते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों के लिए यह अधिक खतरनाक साबित हो सकता है।
गौरतलब है कि इसी होटल में 30 मई से एक जून तक आयोजित विवाह समारोह में देश के विभिन्न शहरों से लगभग 300 मेहमान शामिल हुए थे। समारोह के बाद करीब 150 लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। कई लोगों को उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत के बाद अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ा था। प्रभावित लोगों का इलाज सोनारी स्थित ब्रह्मानंदम अस्पताल तथा टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) में किया गया था।
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पानी और खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के लिए भेजे थे। पानी की रिपोर्ट सामने आने के बाद अब खाद्य पदार्थों की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पनीर, खोवा और अन्य खाद्य सामग्री के नमूनों को रांची स्थित प्रयोगशाला भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लोगों के बीमार पड़ने का मुख्य कारण दूषित पानी था, भोजन था अथवा दोनों।
सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने बताया कि पानी की जांच रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है और खाद्य पदार्थों की रिपोर्ट की प्रतीक्षा की जा रही है। सभी रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने सार्वजनिक आयोजनों, होटलों, बैंक्वेट हॉल और रेस्टोरेंट्स में परोसे जाने वाले पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आरओ सिस्टम लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी नियमित सफाई, रखरखाव और समय-समय पर वैज्ञानिक जांच भी आवश्यक है. फिलहाल पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की अगली कार्रवाई और खाद्य पदार्थों की जांच रिपोर्ट पर लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।



