जमशेदपुर : भारतीय जनसंघ के संस्थापक एवं प्रखर राष्ट्रवादी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के 124वीं जयंती के उपलक्ष्य में भारतीय जनता पार्टी जमशेदपुर महानगर की ओर से संगोष्ठी का आयोजन किया गया। रविवार को साकची स्थित जैन भवन के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में झारखंड भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष बालमुकुंद सहाय, प्रदेश मंत्री सुनीता सिंह मुख्यरूप से शामिल हुए। इस दौरान जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो, विधायक पूर्णिमा साहू, प्रदेश प्रवक्ता अमरप्रीत सिंह काले, कार्यक्रम के प्रदेश सह संयोजक जटाशंकर पांडेय समेत अन्य वरीय नेतागण मुख्यरूप से मौजूद रहे। संगोष्ठी में वक्ताओं ने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। इससे पहले, उपस्थितजनों ने डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र के सम्मुख द्वीप प्रज्वलित कर एवं पुष्प अर्पित कर नमन किया।
संगोष्ठी में मुख्यवक्ता के रूप में अपने विचारों को रखते हुए प्रदेश उपाध्यक्ष बालमुकुंद सहाय ने कहा कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सम्पूर्ण जीवन देश की एकता और अखंडता के लिए समर्पित रहा। कश्मीर से परमिट राज समाप्त करने और उसे भारत का अभिन्न अंग बनाए रखने के लिए उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्रभक्ति, विचारधारा और बलिदान की मिसाल है। संसद में उन्होंने धारा 370 के उन्मूलन की पुरजोर वकालत की और इसे राष्ट्रीय एकता में बाधा बताया। अगस्त 1952 में जम्मू-कश्मीर की एक विशाल जनसभा में उन्होंने संकल्प लिया था कि या तो मैं आपको भारतीय संविधान दिलाकर रहूंगा, या इस उद्देश्य के लिए अपना बलिदान दूंगा। अपने इसी संकल्प को पूरा करने हेतु वे 1953 में बिना परमिट जम्मू-कश्मीर गए, जहां उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया। 23 जून 1953 को रहस्यमय परिस्थितियों में जेल में उनका निधन हो गया। उनकी इस बलिदानपूर्ण मृत्यु ने पूरे देश को झकझोर दिया और परिणामस्वरूप जम्मू-कश्मीर से “परमिट सिस्टम” समाप्त कर दिया गया। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के संकल्प को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साकार करते हुए जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाकर वहां पर विकास और शांति का राज कायम किया है। श्री सहाय ने कहा कि डॉ. मुखर्जी आज भी एकीकृत भारत के लिए राष्ट्रवाद की सबसे बुलंद आवाज हैं।
संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए सांसद बिद्युत बरण महतो ने कहा कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपने जीवन का हर क्षण राष्ट्र की एकता, अखंडता और अक्षुण्णता को समर्पित किया। 1946 में जब पहली अंतरिम सरकार बनी, तो डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी उद्योग मंत्री बनाये गए। ढाई वर्ष के मंत्रित्वकाल में उन्होंने छोटे-बड़े उद्योगों का जाल बिछा दिया जिसमें उन्होंने चितरंजन लोको फैक्ट्री, सिन्दरी खाद कारखाना, हिन्दुस्तान एयरक्राफ्ट फैक्टरी जैसे विशाल कारखाने को स्थापित कर देश के औद्योगिक विकास के साथ आत्मनिर्भर भारत की भी नींव रखी। श्री महतो ने कहा कि डॉ मुखर्जी जीवन के अंतिम क्षण तक वे एक−एक पल लोक कल्याण के लिए जीते रहे। मुझे गर्व है कि मैं जम्मू-कश्मीर से धारा 370 और 35A को हटाने की प्रकिया और चर्चा के दौरान लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर संसद भवन में मौजूद रहा।
वहीं, जमशेदपुर पूर्वी के विधायक पूर्णिमा साहू ने कहा कि बंगभूमि से पैदा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपनी प्रतिभा से पूरे देश को आश्चर्यचकित कर दिया था। देश में ‘एक विधान, एक निशान और एक प्रधान’ की संकल्पना के लिए अथक संघर्ष किया और राष्ट्र की अखंडता के खातिर अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके दिखाए मार्ग पर चलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 और 35A को हटाया और जम्मू-कश्मीर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद बनी पहली सरकार में उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्री के रूप में उन्होंने जो आधारशिला रखी, वह कई मायनों में उत्कृष्ट है।
प्रदेश मंत्री सुनीता सिंह ने कहा कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपने ज्ञान और विचारों से एवं तात्कालिक परिदृश्य की ज्वलंत परिस्थितियों का इतना सटीक विश्लेषण किया कि सभी वर्ग और बुद्धिजीवियों को उनकी बुद्धि का कायल होना पड़ा। अपनी कुशाग्र बुद्धिमत्ता का परिचय देते हुए मात्र 33 वर्ष की अल्पायु में उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय के कुलपति का पदभार संभालने की जिम्मेदारी उठाई।
भाजपा झारखंड प्रदेश प्रवक्ता अमरप्रीत सिंह काले ने कहा कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्र एवं समाज को समर्पित एक आदर्श जीवन था। उनका स्पष्ट मानना था कि राष्ट्रीय एकता के धरातल पर ही सुनहरे भविष्य की नींव रखी जा सकती है।
इस दौरान संगोष्ठी की अध्यक्षता जिला उपाध्यक्ष बबुआ सिंह, मंच संचालन जिला महामंत्री संजीव सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन जिला महामंत्री अनिल मोदी ने किया।
इस अवसर पर पूर्व जिलाध्यक्ष राजकुमार श्रीवास्तव, गुंजन यादव, मिथिलेश सिंह यादव, मनोज सिंह, कुलवंत सिंह बंटी, नीरज सिंह, अनिल सिंह, योगेश मल्होत्रा, कल्याणी शरण, कुसुम पूर्ति, रमेश हांसदा, बबुआ सिंह, जितेंद्र राय, अनिल मोदी, संजीव सिंह, विजय तिवारी, मिली दास, शांति देवी, खेमलाल चौधरी, संजीव कुमार, प्रेम झा, अखिल सिंह, बिनोद सिंह, नीलू मछुआ, मंजीत सिंह, नीतीश कुशवाहा, रमेश बास्के, सागर राय, उज्ज्वल सिंह, संजीत चौरसिया, अमित सिंह, धर्मेंद्र प्रसाद, काजू शांडिल, युवराज सिंह, पप्पू उपाध्याय, विकास शर्मा, बबलू गोप, सूरज सिंह, प्रशांत पोद्दार, अमित मिश्रा, आनंद कुमार, बिनोद राय, रविन्द्र सिसोदिया, अजीत सिंह, पवन अग्रवाल, अप्पा राव, आलोक वाजपेयी, प्रदीप मुखर्जी, कुमार अभिषेक, अजय सिंह, रॉकी सिंह, संजना साहू, रानी ठाकुर, ममता भूमिज, लकी कौर, लीना चौधरी, जितेंद्र मिश्रा, मनोज सिंह, लक्ष्मण बेहरा समेत अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
