धनबाद : चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के पहले पांच महीनों (1 अप्रैल से 31 अगस्त 2025) के लिए पुरानी नीति के तहत 1183 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। कतरास थाना चौक से मछली पट्टी रोड स्थित अधिकृत शराब दुकान पर शराब उपभोक्ताओं को कई प्रमुख ब्रांड्स की शराब नहीं मिल रही है। यहां तक कि बियर के लिए लगे फ्रीजर भी खाली पड़े हैं।

वहीं दूसरी ओर, इलाके में अवैध रूप से संचालित परचूनिया (गैरकानूनी शराब दुकानों) में हर प्रकार की शराब और बीयर ऊंचे दामों पर आसानी से मिल रही है। शराब प्रेमियों का कहना है कि सरकारी अधिकृत दुकानों में भी प्रिंट रेट से ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
उपभोक्ताओं ने सवाल उठाया है कि जब अधिकृत दुकानों में शराब उपलब्ध नहीं है और अवैध दुकानों में मनमानी कीमत पर बेची जा रही है, तो वे अपनी शिकायत आखिर कहां करें? लोगों की मांग है कि मीडिया इस मामले को संबंधित विभागों तक पहुंचाए, ताकि इस पर सख्त कार्रवाई की जा सके और शराब विक्रय व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित हो।
जहां तक एक्सपर्ट की माने तो नई व्यवस्था के तहत हर खुदरा शराब दुकान संचालक को मासिक राजस्व लक्ष्य दिया जाएगा और उन्हें हर महीने की 25 तारीख तक तय राशि विभाग में जमा करना होगा. नई उत्पाद नीति 2025 को लेकर सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ बैठक हुई है, जिसमें कई तरह के सुझाव आए हैं
सात महीने में शराब बेचकर 2402 करोड़ की सरकार करेगी कमाई
उत्पाद विभाग ने 1 सितंबर 2025 से 31 मार्च 2026 तक यानी सात महीनों के लिए कुल 2402 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य तय किया है. इसके तहत प्रत्येक जिला उपायुक्त को उनके क्षेत्र के अनुसार लक्ष्य दिए गए हैं. इससे पहले चालू वित्तीय वर्ष के पहले पांच महीनों 1 अप्रैल 2025 से 31 अगस्त 2025 के लिए पुरानी नीति के तहत 1183 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया था. इस तरह वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कुल राजस्व लक्ष्य 3585 करोड़ रुपये का है.
नई नीति के तहत कई सेल्समैन फार्म व इंटरव्यू का कोरम पूरा किया , लेकिन सेल्समेन कार्य करने से पीछे हट रहे हैं ।
