लेखक : सुभाष शाह
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- आजादी (लगाम – बेलगाम)
अंग्रेजी घोड़ी, भारतीय लगाम
घोड़ी दौड़े बेलगाम
सारी दिशाएं तहस नहस।
परिवहन हो शिक्षा, देश विदेश एक लेखा।
व्यापार घाटा, मुद्रा को ना मिला कोई स्थान।
हर सीमाएं घबराती है, देख चाल घोड़ी की। - घोड़ी – मैं – नस्ल अंग्रेजी, तू लगाम भारतीय।
मैं ही ईमान – बेईमान, सत्यमेव जयते और भ्रष्टाचार।
इज्जत बचाओ, लगाम जनता पर आजमाओ। - मैं ही मालिक हु, सदन प्रतिनिधि।
अर्जी मेरे पास ही लाते, हाथ जोड़ मांगते त्राहिमाम। - मैं तंत्र – स्व – तंत्र ना काहू से दोस्ती न बैर।
पूछो अपने न्यामक (लगाम) से,
कब आता मेरे पास ईमानदारी से।
घोड़ी हु मैं, तू मेरी बोझ नहीं।
बोझ है तेरे दलाल। - अभियोग – महाभियोग के घेरे में न्यामक,
सुप्रीम लगाम से घोड़ी बखाने स्व – तंत्र – ता। - न्यामक – भ्रामक, सारथी अनाड़ी,
रथ हचकोला खाए,
घोड़ी दौड़े बेलगाम।
