जमशेदपुर : परसुडीह स्थित जगन्नाथ मंदिर के समीप श्रीमहल में विश्व हिन्दू परिषद का स्थापना दिवस कार्यक्रम संपन्न हुआ, जहां पहुंचे विहिप के केंद्रीय अधिकारी ने कार्यकर्ताओं और हिंदू समाज के प्रबुद्ध जनों को संबोधित करते हुए बताया कि – विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के दिन 29 अगस्त 1964 में मुंबई के पवई स्थित स्वामी चिन्मयानंद के संदीपनी आश्रम मे संघ के द्वितीय सरसंघचालक परम पूजनीय माधव सदाशिव राव गोलवलकर और सिख, जैन, बौद्ध समाज के गुरू, भारत के प्रमुख साधु संत और तब के हिंदू समाज के पुनरुत्थान हेतू चिंतन करने वाले गुरू के संपर्क मे आये प्रबुद्ध जनों के द्वारा की गई जिसे भगवान कृष्ण के धर्म की पुनर्स्थापना करने के उद्देश्य और लक्ष्य को लेकर विश्व के समस्त हिंदूओं के कल्याण के निमित्त स्थापित किया गया।
1966 में प्रयागराज के कुंभ के आयोजन मे करीब कई देशों से और देशभर से 25000 सनातन समाज के शुभचिंतक, साधु-संत और चारों धाम और मठ के शंकराचार्य जी स्वयं उपस्थित हुए और अपनी शक्ति के साथ विश्व के समस्त हिंदूओं के हित के लिए कार्य करने वाला हिंदू धर्म की रक्षा करने वाला सबसे बडा धार्मिक हिंदू संगठन विश्व हिन्दू परिषद दुनिया के सामने प्रकट हुआ जिसे दैवीय घटना माना गया और विश्व हिन्दू परिषद का हर कार्यकर्ता स्वयं भगवान श्रीकृष्ण के अंश के रूप मे हिंदू समाज की रक्षा करने के लिए संगठन से पूरे भारतवर्ष में जुड़ता चला गया।
1992 में हिंदूओं के माथे पर लगा कलंक मुगल आक्रांता बाबर द्वारा राममंदिर तोड़ बनाया गया बाबरी ढांचे को तोडने का कार्य हो, रामसेतु को बचाने का कार्य, अयोध्या श्रीराम मंदिर का निर्माण ये विश्व हिन्दू परिषद के आंदोलन और त्याग के परिणामस्वरूप ही सफल हो पाया, देश को आजादी सूत कातने से मिली ये बताने वालों को मालूम होना चाहिए कि लाखों वीर योद्धाओं ने लडाई लडकर बलिदान किया अपना रक्त बहाया और जब जब हिंदू समाज एकजुट होकर अपना शौर्य दिखाते है तब तब असुर प्रवृति के लोगों का विनाश निश्चित होता है।
भारत में डेमोग्राफी बदलाव से हिंदूओं की घटती संख्या देश की गंभीर समस्या बनकर उभरी है , कश्मीर, बंगाल , केरल , नार्थ ईस्ट और अब झारखंड की स्थिति हम सभी के सामने है , देश आजाद हुआ पर षड्यंत्र के तहत हिंदूओं के हित के लिए कोई अलग से प्रावधान नही किया गया और अल्पसंख्यक के नाम पर कई सुविधा और लाभ अन्य समुदाय को अबतक पहुंचाया जा रहा है, देश के बडे हिंदू मंदिरो पर राज्य सरकारों ने कब्जा कर रखा है ऐसा षड्यंत्र देश की आजादी के बाद से ही जारी है जबकि बडे पैमाने पर हिंदूओं के द्वारा धर्म कार्य के लिए किया गया दान अल्पसंख्यक समुदाय के उत्थान मे लगाती है जबकि मस्जिद और चर्च पर ऐसा नियंत्रण किसी सरकार के पास नही है।
स्थापना दिवस के मुख्य अतिथि और साहित्यकार त्रिपुरा झा जी ने अपने संबोधन मे हिंदू समाज के बीच समरसता बढाने और सेवा कार्य के माध्यम से हिंदूओं को एकजुट कर संपूर्ण हिंदू समाज मे हिंदू संस्कारों की रक्षा करने का जो बीडा विहिप ने उठाया है उसकी सराहना करते हुए सोये हिंदू समाज को जागृत कर देश की मौजूदा चुनौतिपूर्ण स्थिति से लडकर हिंदूओं को एकजुट रखने का मंत्र दिया , कार्यक्रम मे विहिप दुर्गावाहिनी राष्ट्रीय संयोजिका प्रज्ञा दीदी, प्रांत से देवेंद्र गुप्ता, सुजीत साहू, दीपक शर्मा , सिंंहभूूम विभाग मंत्री अरूण सिंह, विभाग संगठन मंत्री मिथिलेश महतो, जिलाध्यक्ष अजय गुप्ता, उपाध्यक्ष सविता सिंह, गोपीराव, सहमंत्री उत्तम कुमार दास, बजरंगदल संयोजक चंदन दास, सह-संयोजक दीपक बजरंगी, सेवा प्रमुख जीतेंद्र प्रमाणिक, गौरक्षा प्रमुख मनीष सिंह, विशेष संपर्क प्रमुख आशुतोष काबरा, दुर्गावाहिनी सह संयोजिका शोभा पाठक, धर्म प्रसार प्रमुख विवेक सिंह, सह सेवा प्रमुख संतोष वर्मा , राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महानगर कार्यवाह रविंद्र नारायण , संघ से अनिल मिश्रा के संग सैकडों कार्यकर्तागण और प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे।
