जमशेदपुर : स्वास्थ्य मंत्रालय, दिल्ली द्वारा संचालित हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (HMIS) पोर्टल पर समय पर मासिक रिपोर्ट अपलोड नहीं करने वाले निजी अस्पतालों पर अब सख्ती तय मानी जा रही है। जमशेदपुर में 8 निजी अस्पतालों और 1 इम्यूनाइजेशन सेंटर द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर ऑनलाइन प्रतिवेदन नहीं देने का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाॅल ने संबंधित संस्थानों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि यदि तय तिथि तक रिपोर्ट अपलोड नहीं की गई तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
HMIS पोर्टल क्या है और क्यों जरूरी…..
HMIS पोर्टल भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत संचालित एक अहम डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिस पर हर महीने स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़े अपलोड किए जाते हैं। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर नीति आयोग देश और राज्यों में स्वास्थ्य योजनाओं की प्रगति का मूल्यांकन करता है। पहले यह व्यवस्था थी कि सरकारी अस्पताल सीधे ऑनलाइन रिपोर्ट अपलोड करते थे, जबकि निजी अस्पताल हार्ड कॉपी में आंकड़े देते थे, जिन्हें विभाग एक साथ अपलोड करता था।
जिम्मेदारी बढ़ी…..
वर्तमान में HMIS पोर्टल पर जमशेदपुर के 1 निजी इम्यूनाइजेशन सेंटर और कुल 12 निजी अस्पताल पंजीकृत हैं। सभी को प्रत्येक माह की 5 तारीख तक ऑनलाइन रिपोर्ट अपलोड करना अनिवार्य है। इसके बावजूद 8 निजी अस्पतालों ने अब तक मासिक प्रतिवेदन अपलोड नहीं किया, जिससे जिला स्तर पर स्वास्थ्य आंकड़ों के संकलन में परेशानी हो रही है।
इन 8 निजी अस्पतालों ने नहीं दी रिपोर्ट….
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिन संस्थानों ने HMIS पोर्टल पर अब तक रिपोर्ट जमा नहीं की है, उनमें TSUISL इम्यूनाइजेशन, एपेक्स अस्पताल, डॉ. अभिषेक चाइल्ड केयर एंड मैटरनिटी अस्पताल, होली केयर अस्पताल एंड रिसर्च सेंटर, सहारा नर्सिंग एंड रिसर्च सेंटर, वरदान मैटरनिटी एंड नर्सिंग होम, डॉ. हरपाल सिंह सर्जिकल नर्सिंग होम और उमा सुपर स्पेशियलिटी (स्पंद) अस्पताल शामिल हैं।
सिविल सर्जन का सख्त निर्देश…..
सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाॅल ने सभी संबंधित अस्पतालों को निर्देश दिया है कि लंबित प्रतिवेदन हर हाल में 31 दिसंबर 2025 तक HMIS पोर्टल पर अपलोड कर दिए जाएं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस संबंध में उपायुक्त (पूर्वी सिंहभूम) और राज्य मुख्यालय (रांची) को सूचना दे दी गई है, ताकि मामले की नियमित निगरानी की जा सके।
नियमों की अनदेखी पर होगी कानूनी कार्रवाई……
स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में बार-बार HMIS रिपोर्टिंग में लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित निजी अस्पतालों पर क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसमें जुर्माना, नोटिस या पंजीकरण से जुड़ी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
समय पर रिपोर्टिंग से सुधरेगी स्वास्थ्य व्यवस्था…..
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि समय पर और सही आंकड़े मिलने से ही सरकारी योजनाओं की वास्तविक स्थिति सामने आती है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, संसाधनों का सही उपयोग और जरूरतमंदों तक बेहतर सुविधाएं पहुंचाना संभव हो पाता है। ऐसे में सभी निजी और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों का सहयोग बेहद जरूरी है।
