रांची : झारखंड के आदिवासी इलाकों में इतिहास रच दिया गया है। शुक्रवार देर शाम पेसा (PESA) नियमावली की अधिसूचना जारी होते ही अनुसूचित क्षेत्रों में सत्ता का केंद्र बदल गया। अब फैसले सचिवालय या दफ्तरों में नहीं, बल्कि गांव की चौपाल में ग्रामसभा करेगी।
अब बिना ग्रामसभा की अनुमति नहीं होगा भू-अर्जन, बालू खनन, शराब दुकान या जमीन की खरीद-बिक्री। 26 साल बाद हेमंत सोरेन सरकार में आदिवासी समाज को वह अधिकार मिला है, जिसकी मांग दशकों से उठती रही।
अब गांव चलेगा, अफसर नहीं……
अब गांव के जल, जंगल और जमीन पर सीधा हक ग्रामसभा का होगा। कैटेगरी-1 (5 हेक्टेयर से कम) के बालू घाट से लेकर जंगल के उत्पाद, जमीन ट्रांसफर और विकास योजनाओं तक — हर फैसला ग्रामसभा की मंजूरी से होगा।
सरकार का दावा है कि इससे बाहरी ठेकेदारों, बिचौलियों और अफसरशाही का दबदबा खत्म होगा और गांव खुद अपने संसाधनों का मालिक बनेगा।
ग्रामसभा होगी स्थायी, भंग नहीं की जा सकेगी…..
पेसा नियमावली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि…
- ग्रामसभा स्थायी होगी, इसे भंग नहीं किया जा सकेगा।
- पारंपरिक ग्रामसभा को ही मान्यता मिलेगी।
- जनसंख्या से कोई लेना-देना नहीं।
- हर योजना ग्रामसभा की अनुमति से ही आएगी।
- कंपनियां बिना ग्रामसभा की सहमति जमीन नहीं ले सकेंगी।
- यानि अब कागजों की नहीं, परंपरा और सहमति की सरकार चलेगी।
हर महीने अनिवार्य ग्रामसभा बैठक….
- हर महीने कम से कम एक बैठक जरूरी।
- 1/3 कोरम अनिवार्य।
- महिलाओं की कम से कम 1/3 भागीदारी जरूरी।
- बैठक खुले स्थान पर होगी।
- बंद कमरे में हो तो दरवाजा खुला रखना होगा।
- किसी को प्रवेश से रोका नहीं जा सकेगा।
- अध्यक्ष वही होगा जो आदिवासी रीति-रिवाजों से मान्य हो।
बालू घाट अब ग्रामसभा चलाएगी…..
- कैटेगरी-1 बालू घाट का संचालन ग्रामसभा करेगी।
- बालू से मिलने वाला पूरा शुल्क ग्राम कोष में जाएगा।
- जेसीबी से खनन पूरी तरह प्रतिबंधित।
- मानसून में बालू उठाव पर पूर्ण रोक (NGT नियम अनुसार)।
शराब पर महिलाओं की चलेगी सरकार….
- ग्रामसभा की अनुमति के बिना न शराब दुकान न शराब फैक्ट्री।
- महुआ, हड़िया सिर्फ पारंपरिक व घरेलू उपयोग के लिए।
- शराब नियंत्रण में महिलाओं की निर्णायक भूमिका।
गांव के विवाद गांव में ही सुलझेंगे……
- पारिवारिक और जमीन विवाद ग्रामसभा सुलझाएगी।
- अधिकतम 2000 रुपए तक जुर्माना।
- जेल भेजने का अधिकार नहीं।
- गलती स्वीकार कर माफी मांगने पर दंड समाप्त माना जाएगा।
पुलिस को भी ग्रामसभा को देनी होगी जानकारी……
- अगर पुलिस किसी को तत्काल गिरफ्तार करती है तो 7 दिन के भीतर ग्रामसभा को सूचना देना अनिवार्य होगा।
सीएनटी-एसपीटी जमीन पर बड़ा फैसला….
- सीएनटी-एसपीटी मामलों में ग्रामसभा की सहमति जरूरी।
- अवैध कब्जाधारी को कोई मुआवजा नहीं मिलेगा।
- जमीन मूल रैयत या उसके वारिस को लौटेगी
- वारिस न होने पर दूसरे आदिवासी रैयत को बंदोबस्त।
- हर साल 15 अप्रैल तक रजिस्टर-2 की कॉपी ग्रामसभा को देना अनिवार्य।
ग्राम कोष का होगा गठन……
- पंचायत समिति की आय का 80% ग्राम कोष में 20% पंचायत समिति के पास।
- तीन सदस्य, तीन साल के लिए मनोनीत।
- खनिज, वन उत्पाद, सिंचाई, वन्यजीव संरक्षण पर ग्रामसभा का अधिकार।
सरकार का दावा – बदलेगा आदिवासी इलाकों का भविष्य…..
पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा “पेसा नियमावली लागू हो चुकी है। स्वशासन सरकार की प्राथमिकता है।” अब झारखंड उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है, जहां पेसा सिर्फ कानून नहीं, जमीन पर लागू हकीकत बन गया है।
