लोकतंत्र सवेरा डेस्क | पश्चिम सिंहभूम : पश्चिम सिंहभूम जिला इन दिनों दहशत के साए में जी रहा है। जंगल से निकलकर गांव-गांव घूम रहा एक दंतेल हाथी मौत बनकर लोगों पर टूट पड़ रहा है। बीते सिर्फ 7 दिनों में 12 हमले, 17 ग्रामीणों की दर्दनाक मौत और 10 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल—लेकिन सवाल यह है कि वन विभाग आखिर कर क्या रहा है?
ग्रामीणों की चीख-पुकार, मातम और खून से सनी धरती गवाही दे रही है कि हालात कितने भयावह हो चुके हैं। बावजूद इसके, हाथी पर काबू पाने के बजाय वन विभाग का तंत्र तमाशबीन बना बैठा है।
मंगलवार रात का कहर : चार जिंदगियां एक झटके में खत्म……
सबसे दिल दहला देने वाली घटना नोआमुंडी रेंज के बवाडिया गांव की है। मंगलवार रात, जब एक परिवार पुआल से बने अस्थायी आश्रय में गहरी नींद में सो रहा था, तभी दंतेल हाथी ने अचानक हमला कर दिया।
“सोते हुए बच्चों को कुचल दिया गया… मां-बाप चीखते रहे, लेकिन मौत सबको रौंदती चली गई…”
इस एक हमले में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जिनमें छोटे-छोटे मासूम बच्चे भी शामिल थे। गांव में मातम पसरा है, हर आंख नम है और हर जुबान पर सिर्फ एक ही सवाल—
“हम कब तक मरते रहेंगे?”
110 किलोमीटर का मौत का दायरा…….
बताया जा रहा है कि यह दंतेल हाथी करीब 110 किलोमीटर के दायरे में सर्कुलर मूवमेंट कर रहा है। जहां जाता है, वहां तबाही छोड़ जाता है। कोल्हान और चाईबासा फॉरेस्ट डिवीजन की 7 फॉरेस्ट रेंज उसके निशाने पर हैं।
ग्रामीणों का कहना है— “रात होते ही डर लगने लगता है… खेत जाना बंद, घर से निकलना बंद… ये जिंदगी नहीं, सजा हो गई है!”
16 मौतों के बाद जागा विभाग, अब भी हाथ खाली…….
जब मौतों का आंकड़ा 16 पार कर गया, तब जाकर वन विभाग ने हाथी को ट्रैंकुलाइज (बेहोश) करने का फैसला लिया। बंगाल से हाथी हांका टीम बुलाई गई, ओडिशा से वाइल्ड लाइफ सेंचुरी की टीम तैनात की गई, स्थानीय वनकर्मी भी अलर्ट पर हैं।
लेकिन सच्चाई यह है कि— अब तक हाथी की सटीक लोकेशन ट्रैक नहीं हो सकी है।
यानी तैयारी बहुत, नतीजा शून्य!
ग्रामीणों का फूटता गुस्सा…..
इलाके में आक्रोश चरम पर है। ग्रामीण साफ शब्दों में कह रहे हैं— “अगर सरकार और वन विभाग नहीं संभले, तो हम सड़क पर उतरेंगे। आखिर हमारी जान की कीमत क्या कुछ भी नहीं?”
लोगों का आरोप है कि न तो समय पर ट्रैकिंग हुई, न ही कोई प्रभावी रोकथाम की गई। सिर्फ कागजी कार्रवाई और बयानबाजी से हालात नहीं संभलेंगे।
सवाल जो सिस्टम से टकराते हैं…..
- जब हाथी पहले ही हमले कर रहा था, तब कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- क्या 17 मौतों के बाद भी प्रशासन को और लाशों का इंतजार है?
- क्या ग्रामीणों की जान की कीमत इतनी सस्ती है?
- “हाथी नहीं, सिस्टम कुचल रहा है लोगों को!”
अब भी वक्त है……..
अगर जल्द और ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह दंतेल हाथी और जिंदगियां निगल सकता है। जरूरत है तत्काल ट्रैकिंग, प्रभावी ऑपरेशन और ग्रामीणों की सुरक्षा की ठोस व्यवस्था की।
