मुरी : लोसेरा की रहने वाली लक्षमी मांझी की व्यथा यह है कि सन् दो हजार बाईस में जंगली हाथी घर को तोड़ कर तहस नहस कर दिया। उस समय से घर निर्माण के लिए क ई बार आवेदन दिया,पर कोई भी नहीं सुना। किसी तरह कच्चा घर बना कर रह रही है। उसे डर है कि कहीं पुनः जंगली हाथी उसके घर को तोड़ न दे। दुसरी व्यथा कि घर से दुर पानी पीने के लिए पानी लाना पड़ता है। अभी फिलहाल स्वयं गभ्रवती है। पति रांची में रहकर काम करता है। एक छोटा बेटा उसके साथ रहता है। सास ससुर भी नहीं है।
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रिपोर्ट : रिंकी कुमारी ( सिल्ली संवाददाता)
