(लोकतंत्र सवेरा संवाददाता) राँची : जीवन बचाने वाली 108 एम्बुलेंस सेवा के कर्मियों को ही दो महीने से वेतन नहीं मिला है। सवाल यह है कि जब कर्मी ही भूखे होंगे तो वे दूसरों की जान कैसे बचाएंगे?

















































वेतन रुकने से 108 कर्मियों की हालत बद से बदतर हो चुकी है, कई कर्मी दाने-दाने को मोहताज हैं। कर्मियों का कहना है कि इसी वेतन से घर चलता है, बच्चों की पढ़ाई होती है और बीमार माता-पिता की दवाइयाँ आती हैं, लेकिन समय पर भुगतान नहीं होने से परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गया है।
संघ ने दो टूक चेतावनी दी है कि अगर कल तक वेतन का भुगतान नहीं किया गया तो मजबूरन हड़ताल की घोषणा की जाएगी। अगर इसके बाद 108 एम्बुलेंस सेवा ठप होती है और किसी मरीज की जान जाती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी 108 एम्बुलेंस संचालन करने वाली कंपनी और जिम्मेदार अधिकारियों की होगी।
कर्मियों ने सवाल खड़ा किया है कि आखिर वेतन में बार-बार देरी क्यों? क्या जीवनरक्षक सेवा में काम करने वालों के साथ ऐसा व्यवहार न्यायसंगत है? अब देखना यह है कि सरकार और प्रशासन कब तक चुप्पी साधे रहता है।





