जमशेदपुर : झारखंड में नक्शा विचलन मामले में बड़ी कार्रवाई के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए तोड़फोड़ अभियान पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट के निर्देश पर साकची और बिष्टुपुर में शुरू की गई शुक्र भवन की तोड़फोड़ को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने न केवल तत्काल प्रभाव से स्टे लगाया, बल्कि चार सप्ताह के भीतर जवाब भी तलब कर लिया है।

11 बजे शुरू हुई कार्रवाई, दोपहर में सुप्रीम कोर्ट का स्टे……
हाईकोर्ट के आदेश के बाद सोमवार सुबह 11 बजे जेडीसी (Jamshedpur Development Authority) की टीम ने साकची न्यू एरिस्टार (होल्डिंग नंबर-47), बिष्टुपुर न्यू रमणीकुर (होल्डिंग नंबर-95-बी), स्थित भवनों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू की।।हथौड़ों और आधुनिक ड्रिल मशीनों से छत और दीवारें तोड़ी जा रही थीं। मौके पर करीब 140 मजदूरों की फौज तैनात थी।
1:22 बजे स्टे की सूचना, 2:30 बजे फिर शुरू हुई तोड़फोड़……
दोपहर 1:22 बजे सुप्रीम कोर्ट से स्टे की सूचना मिलने पर कुछ देर के लिए काम रोका गया, लेकिन आधिकारिक पुष्टि न मिलने के कारण 2:30 बजे दोबारा तोड़फोड़ शुरू कर दी गई। इसी बीच भवन मालिकों और अधिवक्ताओं में हलचल मच गई, अधिकारी फोन पर व्यस्त नजर आए।
3:30 बजे लौटी जेसीबी टीम……
जब सुप्रीम कोर्ट से स्टे की आधिकारिक पुष्टि हो गई, तब जाकर दोपहर 3:30 बजे जेडीसी की टीम मौके से वापस लौटी। हालांकि तब तक दोनों भवनों की छत और दीवारों के कुछ हिस्से तोड़े जा चुके थे।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त संदेश…..
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा— बिना सभी विकल्पों पर विचार किए सीधे तोड़फोड़ का आदेश देना गलत, 2016 के सुप्रीम कोर्ट दिशा-निर्देशों का उल्लंघन हुआ है, राज्य सरकार और जेडीसी को चार सप्ताह में जवाब देना होगा, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट का 14 जनवरी 2026 का आदेश फिलहाल लागू नहीं होगा, इसलिए यह राहत सभी 24 भवनों पर प्रभावी मानी जाएगी।
तीन याचिकाकर्ताओं को ही राहत? कोर्ट ने किया स्पष्ट…..
सरकारी पक्ष की दलील थी कि राहत केवल तीन याचिकाकर्ताओं तक सीमित होनी चाहिए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि मामले की प्रकृति व्यापक है और सभी प्रभावित भवनों पर इसका असर पड़ेगा।
अगली सुनवाई 9 मार्च को…..
दिनभर इस कार्रवाई को लेकर शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। अब झारखंड हाईकोर्ट में नक्शा विचलन मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च को होगी।
