बोकारो : बोकारो इस्पात संयंत्र (BSL) के लिए अधिग्रहित विस्थापित गांवों को पंचायती राज व्यवस्था में शामिल करने को लेकर बोकारो विधायक श्वेता सिंह और झारखंड सरकार की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह के बीच गंभीर चर्चा हुई। विधायक ने इस लंबे समय से लंबित मुद्दे के शीघ्र समाधान की मांग की।
विधायक श्वेता सिंह ने बताया कि वर्ष 1956 से 1962 के बीच बोकारो इस्पात संयंत्र की स्थापना के लिए 49 गांवों का अधिग्रहण किया गया था। इनमें से लगभग 20 मौजाओं के रैयत आज भी अपने मूल निवास स्थलों पर रह रहे हैं, लेकिन अब तक इन गांवों को किसी भी ग्राम पंचायत या नगर निकाय से नहीं जोड़ा गया है। इसके कारण करीब 70 हजार से अधिक लोग पिछले छह दशकों से पंचायत प्रतिनिधित्व, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और बुनियादी प्रशासनिक सुविधाओं से वंचित हैं।
विधायक ने संविधान के अनुच्छेद 243 और झारखंड पंचायती राज अधिनियम, 2001 की धारा 13(1) का हवाला देते हुए कहा कि विस्थापित गांवों को पंचायती राज व्यवस्था में शामिल करना जनहित में जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक पुनर्गठन का नहीं, बल्कि हजारों विस्थापित परिवारों के संवैधानिक अधिकार, पहचान और सम्मान से जुड़ा हुआ है।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा कि राज्य सरकार विस्थापित परिवारों के अधिकारों के प्रति संवेदनशील है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विभागीय स्तर पर आवश्यक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए सकारात्मक पहल की जाएगी। विधायक श्वेता सिंह ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार के सहयोग और समन्वय से यह लंबित मामला जल्द समाधान की ओर बढ़ेगा और प्रभावित परिवारों को स्थानीय स्वशासन से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
