जमशेदपुर/चांडिल : चांडिल प्रखंड में स्थित बिहार स्पंज आयरन लिमिटेड एक बार फिर बंद हो गया है। बीएसआईएल और वनराज स्टील के बीच लंबे समय से चल रहे किराया विवाद ने अब गंभीर रूप ले लिया है। शुक्रवार को बीएसआईएल प्रबंधन ने कंपनी गेट पर बैरियर लगाकर उत्पादन पूरी तरह ठप कर दिया, जिससे सैकड़ों श्रमिकों और उनके परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2022 से वनराज स्टील यह प्लांट किराये पर चला रही थी। पहले तय समझौते के अनुसार प्रति माह दो करोड़ रुपये किराया देना था, जिसे बाद में घटाकर एक करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया। वनराज स्टील इस पर सहमत हो गई, लेकिन बीएसआईएल के मोदी ग्रुप ने किराया घटाने पर सहमति नहीं दी। इसी विवाद के चलते प्लांट का संचालन रोक दिया गया।
यह प्लांट पहले भी वर्ष 2013 में बंद हुआ था, जिसे करीब 9 साल बाद जनवरी 2022 में दोबारा शुरू किया गया था। लेकिन महज तीन साल के भीतर एक बार फिर ताला लगने से स्थानीय लोगों की उम्मीदें टूट गई हैं। प्लांट की तीनों यूनिट अब पूरी तरह बंद हैं और उत्पादन शून्य हो चुका है।
करीब डेढ़ महीने पहले बीएसआईएल के मालिक उमेश कुमार मोदी ने चांडिल का दौरा किया था और स्थानीय लोगों व प्रबंधन से बातचीत की थी। उस समय क्षेत्र में कंपनी के विस्तार और स्थायी रोजगार की उम्मीद जगी थी, लेकिन अब हालात इसके बिल्कुल उलट हैं। प्लांट बंद होने से न सिर्फ मजदूर, बल्कि आसपास के छोटे दुकानदार और व्यवसायी भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।
पंच ग्राम विस्थापित समिति छोटालाखा के सचिव आशुतोष बेसरा ने कहा कि कंपनी चाहे कोई भी चलाए, लेकिन स्थानीय लोगों को रोजगार मिलना चाहिए। जनवरी महीने में मजदूरों ने काम किया है, इसलिए उनका बकाया वेतन तुरंत दिया जाना चाहिए।
आज इस पूरे मामले को लेकर बैठक होने वाली है, जिसमें आगे का फैसला लिया जाएगा। मजदूरों की निगाहें अब प्रशासन और कंपनी प्रबंधन पर टिकी हैं कि क्या उन्हें दोबारा काम मिलेगा या चांडिल का यह उद्योग क्षेत्र एक बार फिर वीरान हो जाएगा।
