जमशेदपुर : कांग्रेस पार्टी से निष्कासन के बाद शहिस्ता परवीन उर्फ जेबा खान का दर्द अब सड़कों पर छलक आया है। आंखों में आंसू, आवाज़ में गुस्सा और शब्दों में आग… जेबा खान ने खुलकर वो सब कह दिया, जो अब तक पार्टी के अंदर दबा हुआ था। उनका आरोप है कि कांग्रेस में मेहनतकश कार्यकर्ताओं की नहीं, बल्कि “परिवारवाद और मलाईदार राजनीति” की चलती है। “अगर किसी कांग्रेस कार्यकर्ता बहन को टिकट मिलता, तो इतना दुख नहीं होता…”
भावुक जेबा खान ने रोते हुए कहा—
“अगर किसी कांग्रेस कार्यकर्ता बहन को टिकट दिया जाता, तो मुझे इतना दुख नहीं होता। लेकिन हर बार मलाई आखिर क्यों पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता के परिवार को ही मिलती है?” उनके इस बयान ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जेबा का कहना है कि पार्टी ज़मीनी कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर चंद परिवारों के इर्द-गिर्द सिमटती जा रही है।
“कांग्रेस में मलाई, भाजपा में टांग!”……..
जेबा खान यहीं नहीं रुकीं। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और बन्ना गुप्ता के साथ वायरल हो रही तस्वीरों को लेकर भी तीखा तंज कसा। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि…..
“ये लोग कांग्रेस में सिर्फ मलाई खाने आते हैं और दूसरी टांग भाजपा में रखते हैं। जब फायदा दिखता है, उधर झुक जाते हैं।” इस बयान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। सवाल उठने लगे हैं—क्या कांग्रेस के अंदर दोहरी राजनीति चल रही है?
निष्कासन पर गुस्सा, लेकिन विचारधारा पर अडिग!…….
पार्टी से निकाले जाने पर जेबा खान का दर्द गुस्से में बदल गया। उन्होंने दो टूक कहा—
“आप मुझे पार्टी से निकलवा सकते हैं, लेकिन मेरे अंदर से कांग्रेस की विचारधारा कैसे निकालेंगे?” उनके इस जज़्बाती बयान ने यह साफ कर दिया कि लड़ाई सिर्फ टिकट या पद की नहीं, बल्कि सम्मान, हक़ और विचारधारा की है।
कांग्रेस के लिए चेतावनी की घंटी?……..
जेबा खान का यह विस्फोटक बयान ऐसे समय आया है जब नगर निगम चुनाव सिर पर हैं। पार्टी के भीतर खुलकर सामने आई यह बगावत कांग्रेस के लिए राजनीतिक सिरदर्द बन सकती है।.ज़मीनी कार्यकर्ताओं में पहले से ही नाराज़गी थी, और अब जेबा खान की खुली बगावत ने आग में घी डालने का काम किया है।
चुनावी माहौल में बढ़ा सियासी तापमान…….
मानगो और आसपास के इलाकों में इस घटनाक्रम की चर्चा तेज़ है। समर्थकों का कहना है कि जेबा खान ने वो सवाल उठाए हैं, जो हर आम कार्यकर्ता के मन में हैं।
सवाल बड़ा है……
क्या कांग्रेस आत्ममंथन करेगी या फिर ऐसे ही आवाज़ उठाने वालों को बाहर का रास्ता दिखाती रहेगी?
