जमशेदपुर : उत्तराखंड की राजधानी में हुए चर्चित शूटआउट ने पूरे प्रदेश को हिला दिया है। शहर के व्यस्त इलाके में स्थित सिल्वर सिटी मॉल में जिम से बाहर निकलते समय बदमाशों ने विक्रम शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी। शुरुआती जांच में यह मामला सिर्फ गैंगवार नहीं बल्कि गहरी पारिवारिक साजिश का परिणाम सामने आ रहा है। पुलिस के मुताबिक हत्या की पटकथा महीनों पहले तैयार की गई थी और इसके पीछे संपत्ति का विवाद मुख्य वजह बताया जा रहा है। घटना शुक्रवार सुबह की है। विक्रम शर्मा रोज की तरह मॉल स्थित जिम में वर्कआउट के बाद बाहर निकले ही थे कि पहले से घात लगाए हमलावरों ने नजदीक से गोलियां बरसा दीं। हमला इतना अचानक था कि उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला।
सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर पुलिस ने इसे सुनियोजित कॉन्ट्रैक्ट किलिंग माना है। जांच एजेंसियों को शक है कि हत्या की साजिश विक्रम के छोटे भाई अरविंद शर्मा ने रची। पुलिस सूत्रों के अनुसार योजना की नींव कई महीने पहले रखी गई थी। बताया जा रहा है कि साजिश जमशेदपुर में तैयार की गई, जहां आरोपियों के संपर्क और आपराधिक नेटवर्क सक्रिय थे. पुलिस को ऐसे संकेत मिले हैं कि पूरा प्लान झारखंड में बैठकर बनाया गया। जांच में सामने आया कि परिवार के पास देहरादून और अन्य जगहों पर करोड़ों की जमीन और कारोबार है। इन्हीं संपत्तियों को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था।
हमलावरों ने कई दिनों तक की विक्रम शर्मा की रेकी…..
सूत्रों के मुताबिक संपत्ति के नियंत्रण और हिस्सेदारी को लेकर दोनों भाइयों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा था, जो आखिरकार हत्या की साजिश तक पहुंच गया। पुलिस का दावा है कि हत्या को अंजाम देने के लिए पेशेवर शूटर बुलाए गए थे। जांच में सामने आया कि हमलावर हरिद्वार से वाहन किराए पर लेकर देहरादून पहुंचे। हमलावरों ने पहले कई दिनों तक विक्रम शर्मा की गतिविधियों की रेकी की. वह कब जिम जाते हैं? कब लौटते हैं और किस रास्ते से आते-जाते हैं? पूरी जानकारी जुटाने के बाद वारदात को अंजाम दिया गया।
महीनों पहले लिखी गई थी हत्या की पटकथा…..
जांच अधिकारियों का कहना है कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी। हत्या की पूरी योजना महीनों पहले तैयार कर ली गई थी। वाहन किराए पर लेने, पहचान छिपाने और भागने के रास्ते तक सब कुछ पहले से तय था।
पुलिस जांच तेज, नेटवर्क खंगाल रही एजेंसियां…..
पुलिस ने शूटरों की पहचान कर ली है और पूरे आपराधिक नेटवर्क की जांच जारी है। सीसीटीवी फुटेज, स्थानीय इनपुट और संदिग्धों की गतिविधियों के आधार पर कई अहम सुराग मिले हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि साजिश में और कौन-कौन शामिल था तथा वित्तीय लेनदेन किसके जरिए हुआ।
