मयूरभंज (ओडिशा): अखिल भाषा कार्य समिति की वार्षिक आम बैठक एवं हो भाषा आंदोलन की समीक्षा बैठक रविवार को मयूरभंज जिले के करंजिया ब्लॉक स्थित बंशाही, करंजिया के हो समाज संस्कृति भवन परिसर में गंभीर, संगठित और प्रतिबद्ध वातावरण में संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामराय मुंडुया ने की।
बैठक की शुरुआत में अध्यक्ष ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए हो भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने के लिए वर्षों से चल रहे आंदोलन में योगदान देने वाले कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। सर्वसम्मति से यह संकल्प लिया गया कि हो भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने और ओडिशा की दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा दिलाने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों पर आंदोलनात्मक दबाव और तेज किया जाएगा।
दिल्ली और भुवनेश्वर आंदोलन की समीक्षा
समीक्षा सत्र में दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित ‘दिल्ली चलो 5.0’ के दो दिवसीय धरना-प्रदर्शन और राजधानी में विभिन्न संवैधानिक पदाधिकारियों को ज्ञापन सौंपने की विस्तृत चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, विपक्ष के नेता राहुल गांधी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर हो भाषा की मांग रखी थी।
इसके अलावा 12 दिसंबर 2025 को लोअर पीएमजी, भुवनेश्वर में आयोजित विशाल जनप्रदर्शन तथा ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से आठवीं अनुसूची में हो भाषा को शामिल करने हेतु केंद्र सरकार को अनुशंसा भेजने और दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा देने की मांग पर भी चर्चा की गई।
बैठक में बताया गया कि जनजातीय कार्य मंत्री नित्यानंद गोंड की अध्यक्षता में टीएसी उप-समिति का गठन किया गया है, जिसे हो भाषा की विरासत और आंदोलन के इतिहास से संबंधित ज्ञापन सौंपा गया है। हालांकि, टीएसी की बैठक में समुदाय के कुछ जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति पर सदस्यों ने खेद व्यक्त किया।
धन स्वीकृति और जमीनी स्तर पर अभियान का निर्णय
समीक्षा बैठक में वर्ष 2025-2026 के दौरान दिल्ली और भुवनेश्वर परियोजनाओं के लिए एकत्रित धन के पूर्ण व्यय अनुमान को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई। साथ ही आंदोलन को और मजबूत करने के लिए ग्राम, पंचायत और ब्लॉक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने तथा जमीनी स्तर से धन संग्रह और बुद्धिजीवियों का सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
केंद्रीय जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री दुर्गादास उइके द्वारा लोकसभा में आठवीं अनुसूची में नई भाषाओं को शामिल करने की कोई नीति नहीं होने संबंधी बयान पर चिंता व्यक्त करते हुए आंदोलन को और व्यापक बनाने का आह्वान किया गया।
जनगणना और सांस्कृतिक पहचान पर जोर
सभी सामाजिक संगठनों ने वर्तमान जनगणना में जाति “हो”, मातृभाषा “हो” और धर्म “सरना” को स्पष्ट रूप से दर्ज करने की मांग की। ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम से आए प्रतिनिधियों ने हो भाषा साहित्य को समृद्ध करने के लिए कथा, नाटक, एकालाप और अनुवाद साहित्य को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
वक्ताओं ने कहा कि हो भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि इतिहास, लोककथाओं, धार्मिक विश्वासों और सामुदायिक पहचान की आधारशिला है। डिजिटल माध्यम से भाषा के प्रसार और शोध लेखन को बढ़ावा देने का भी आह्वान किया गया।
विभिन्न संगठनों की सहभागिता
बैठक का मुख्य आकर्षण विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों की एकजुटता रही। सिदहोरा सुसार अकाला, मयूरभंज आदिवासी हो समाज समिति, आदिवासी हो समाज युवा महासभा, आदिवासी हो समाज महासभा, देसौली फाउंडेशन, कटक दिशाम हो समाज, ढेंकनाल एवं भुवनेश्वर छात्र संघ सहित अनेक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर भाषा और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए एक मंच पर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
साथ ही अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के निदेशक सुधाकर सबर को आधिकारिक दस्तावेजों में “हो, मुंडा, कोल और कोल्हो” के रूप में संशोधन करने हेतु ज्ञापन सौंपा गया। बैठक में केंद्रीय समिति के उपाध्यक्ष चंद्र मोहन हैबरू, शांति सिद्धू, सचिव गमेया अमांग, कोषाध्यक्ष खिरोद हेम्ब्रम सहित कई पदाधिकारी और ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल एवं असम के सामाजिक संगठनों के नेता उपस्थित रहे।
अंत में सचिव गमेया अमांग ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए बैठक के समापन की घोषणा की। सभी संगठनों ने एक स्वर में चेतावनी दी कि जब तक हो भाषा को संवैधानिक मान्यता नहीं मिल जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा और यदि मांगें नहीं मानी गईं तो देशव्यापी स्तर पर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन और तेज किया जाएगा।
