सरायकेला-खरसावां : चांडिल थाना क्षेत्र अंतर्गत एनएच-33 पर स्थित ग्राम कंदरबेड़ा – रामगढ़ में बने हाथी अंडरपास के दूसरे छोर पर अवरोध देखे जाने को लेकर स्थानीय संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। इस मुद्दे को लेकर दलमा अनुसूचित क्षेत्र ग्राम सभा सुरक्षा मंच (कोल्हान प्रमंडल) के पदाधिकारी मौके पर एकत्रित हुए और प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की।
मंच के सचिव सुखलाल पहाड़िया, केंद्रीय सह-सचिव डॉ. सत्य नारायण मुर्मू तथा विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने संयुक्त रूप से इस पर आपत्ति जताई और इसे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन में बाधा बताया।
विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने कहा कि दलमा वन क्षेत्र से हाथियों का पलायन लगातार बढ़ रहा है और अब उनका आवागमन चांडिल डैम क्षेत्र की ओर अधिक देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि हाथियों के पारंपरिक मार्गों में अवरोध पैदा करने से मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं बढ़ने की आशंका रहती है। महतो ने सवाल उठाया कि यदि हाथियों के पारगमन के लिए अंडरपास का निर्माण किया गया है, तो वहां अवरोध क्यों लगाया गया है। उन्होंने कहा कि यदि हाथियों के लिए इसकी आवश्यकता नहीं थी, तो जनता के कर के पैसे से इसका निर्माण क्यों किया गया। साथ ही उन्होंने मांग की कि यदि अवैध रूप से अवरोध किया गया है, तो प्रशासन इसे तत्काल हटाने की कार्रवाई करे।
सुखलाल पहाड़िया ने आरोप लगाया कि एलिफेंट कॉरिडोर के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन कई वर्षों से इस क्षेत्र में हाथियों का आवागमन में एक भी भी हाथी देखने को नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि इस योजना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि योजना का उद्देश्य कितना पूरा हुआ है। पहाड़िया ने यह भी आरोप लगाया कि औद्योगिक गतिविधियों और फैक्ट्रियों के विस्तार से हाथियों के पारंपरिक रास्तों पर असर पड़ रहा है, जिससे वन्यजीवों का आवागमन प्रभावित हो सकता है। उन्होंने वन विभाग से इस पूरे मामले में संज्ञान लेने की मांग की।
वहीं केंद्रीय सह-सचिव डॉ. सत्य नारायण मुर्मू ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम के तहत यदि किसी योजना का कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरा नहीं होता है तो उसकी समीक्षा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हाथियों के सुरक्षित आवागमन और पर्यावरण संरक्षण के लिए बनाई गई योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करना सरकार और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।
मंच के पदाधिकारियों ने प्रशासन और वन विभाग से मांग की कि हाथी अंडरपास में लगाए गए अवरोध की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि वन्यजीवों के प्राकृतिक मार्ग सुरक्षित रह सकें और भविष्य में मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को रोका जा सके।
