जमशेदपुर : निजी स्कूलों द्वारा मनमाने शुल्क वसूली पर लगाम कसने की दिशा में झारखंड सरकार का स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग सक्रिय हो गया है। विभाग की अपर सचिव सीता पुष्पा ने 11 मार्च को राज्य के सभी उपायुक्तों, जिला शिक्षा अधीक्षकों एवं जिला शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र जारी कर अविलंब विद्यालय स्तरीय फीस समिति तथा जिला स्तरीय शुल्क निर्धारण/विनियमन समिति के गठन एवं उन्हें क्रियाशील करने का निर्देश दिया है। साथ ही, शुल्क नियंत्रण एवं विनियमन को लेकर की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की गई है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार, “झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम, 2017” के प्रावधानों के अनुरूप इन समितियों का गठन अनिवार्य है, लेकिन कई जिलों में अब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी या समितियां निष्क्रिय पड़ी थीं। इसी कारण निजी स्कूल प्रबंधन द्वारा अभिभावकों से मनमाना शुल्क वसूले जाने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं।
इस मामले को भाजपा नेता सह “शिक्षा सत्याग्रह” के संस्थापक अंकित आनंद ने गंभीरता से उठाते हुए मार्च के प्रारंभ में केंद्रीय स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्रालय तथा झारखंड के शिक्षा सचिव को पत्र भेजा था। उन्होंने समितियों के गठन नहीं होने और उनके निष्क्रिय रहने के कारण अभिभावकों के आर्थिक दोहन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। विभाग ने अब इस पत्राचार के आलोक में कार्रवाई करते हुए संबंधित निर्देश जारी किए हैं और इसकी सत्यापित प्रति अंकित आनंद को भी सूचनार्थ उपलब्ध कराई है।
इधर, जमशेदपुर में भी जिला शिक्षा विभाग स्तर पर समिति की बैठक आयोजित करने की तैयारी शुरू हो गई है।
शिक्षा सत्याग्रह के संस्थापक अंकित आनंद ने कहा कि सरकार का यह कदम अभिभावकों को बड़ी राहत देगा। लंबे समय से फीस को लेकर कोई प्रभावी निगरानी नहीं थी। अब समिति के सक्रिय होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और मनमानी पर रोक लगेगी। जरूरत है कि निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सही समय पर संज्ञान लेने के लिए केंद्रीय स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्रालय एवं राज्य सरकार के प्रति आभार जताया है।
माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में राज्यभर में फीस समितियां सक्रिय होने के बाद स्कूल शुल्क के विनियमन एवं नियंत्रण को लेकर ठोस कार्रवाई देखने को मिलेगी।
