धनबाद : झारखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और अटूट आस्था का पर्व ‘चैत्र पर्व’ (भोक्ता पर्व) इन दिनों पूरे राज्य में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में छात्र और जन नेता जयराम महतो का एक बेहद प्रभावशाली रूप सामने आया है, जिसने सबको हैरान और मंत्रमुग्ध कर दिया है।


हवा में लटककर किया कठिन अनुष्ठान
अपनी बेबाक राजनीति के लिए पहचाने जाने वाले जयराम महतो इस बार एक पूरी तरह से अलग अवतार में नजर आए। उन्होंने पारंपरिक ‘भोक्ता’ का रूप धारण कर भगवान शिव की कठिन आराधना की। अनुष्ठान के दौरान, वे कई फीट ऊँचे लकड़ी के खंभे (चरक) पर पीठ के सहारे लटककर हवा में गोल-गोल घूमते नजर आए। यह दृश्य न केवल उनकी अटूट शिवभक्ति को दर्शाता है, बल्कि झारखंड की प्राचीन और कठिन परंपराओं के प्रति उनके समर्पण को भी सिद्ध करता है।
अपनी संस्कृति के प्रति गहरा जुड़ाव
जयराम महतो अक्सर झारखंड की जल, जंगल और जमीन की बात करते रहे हैं, लेकिन इस बार उन्होंने खुद इस पारंपरिक अनुष्ठान का हिस्सा बनकर यह संदेश दिया कि वे यहाँ की संस्कृति और जड़ों से गहराई से जुड़े हुए हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
इस साहसी अनुष्ठान को देखने के लिए ग्रामीणों का भारी हुजूम उमड़ा था। जयराम महतो के इस भक्ति रूप की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। लोग उनके इस साहस की सराहना कर रहे हैं और इसे झारखंड की लोक परंपराओं को जीवित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम बता रहे हैं।
क्या है भोक्ता पर्व?
आपको बता दें कि चैत्र महीने के अंत में मनाए जाने वाले इस पर्व में भक्त (जिन्हें भोक्ता कहा जाता है) कठिन उपवास रखते हैं और भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए कई जोखिम भरे अनुष्ठान करते हैं। मान्यता है कि इससे क्षेत्र में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
