रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति में देरी को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने रांची के उपायुक्त की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए अवमानना का नोटिस जारी किया है। साथ ही अगली सुनवाई में उन्हें व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया गया है। यह मामला दिवंगत कर्मचारी के आश्रित को नौकरी देने से जुड़ा है, जिसमें लंबे समय से आदेश का पालन नहीं किया गया।
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मामले की सुनवाई जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ में हुई। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या रांची के उपायुक्त खुद को विभाग के प्रधान सचिव से ऊपर मानते हैं, जो कोर्ट के स्पष्ट आदेशों का पालन नहीं कर रहे।कोर्ट ने उपायुक्त सह जिला अनुकंपा नियुक्ति समिति के अध्यक्ष मंजूनाथ भजंत्री को अवमानना का नोटिस जारी किया है। उन्हें अगली सुनवाई में सशरीर उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा श्रम विभाग के प्रधान सचिव को भी कोर्ट में उपस्थित होकर यह बताने को कहा गया है कि 2019 में नियुक्ति का आदेश जारी होने के बावजूद अब तक उसे लागू क्यों नहीं किया गया।
यह मामला दिवंगत कर्मचारी राजकुमार राम के बेटे की अनुकंपा नियुक्ति से जुड़ा है। पहले बड़े बेटे का आवेदन उम्र अधिक होने के कारण खारिज हुआ, जिसके बाद छोटे बेटे ने दावा किया। कोर्ट ने पहले ही नियुक्ति पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था, लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। सुनवाई के दौरान उपायुक्त की ओर से दाखिल शपथ पत्र में कहा गया कि बड़े भाई से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) नहीं मिलने के कारण नियुक्ति नहीं हो सकती। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि तकनीकी बहानों से न्यायिक आदेशों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं होगी।
अदालत ने यह भी पूछा कि आदेश का पालन न करने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई। इस मामले की अगली सुनवाई 5 मई को होगी, जहां दोनों वरिष्ठ अधिकारियों को कोर्ट के सवालों का जवाब देना होगा।