जमशेदपुर : जमशेदपुर का एमजीएम अस्पताल इन दिनों गंभीर लापरवाही, अव्यवस्था और प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बनता जा रहा है। एक ओर यहां गरीब और जरूरतमंद मरीज इलाज, दवाइयों और बुनियादी सुविधाओं के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं, वहीं दूसरी ओर अस्पताल को उपलब्ध कराया गया मुख्यमंत्री यूनाइटेड फंड लाखों रुपये की राशि के रूप में विभागों में बिना उपयोग के पड़ी हुई है। यह स्थिति न केवल हैरान करने वाली है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की संवेदनहीनता को भी उजागर करती है।



इस गंभीर मुद्दे पर सौरव विष्णु ने अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब गरीब मरीज एक-एक दवा के लिए बाहर मेडिकल दुकानों के चक्कर काटने को विवश हैं, तब अस्पताल के लिए आवंटित लाखों रुपये आखिर अलमारियों में क्यों बंद पड़े हैं? आखिर इस लापरवाही का जवाब कौन देगा—अस्पताल प्रबंधन या स्वास्थ्य विभाग?
इतना ही नहीं, कई विभागों ने खर्च का पूरा विवरण और बिल तक जमा नहीं किया, जिससे वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि जनता के धन के उपयोग में गंभीर अनियमितता का मामला है। स्थिति और भी चिंताजनक तब हो जाती है जब अस्पताल में लगातार आत्महत्या की घटनाएं सामने आ रही हैं। बार-बार ऐसी दर्दनाक घटनाओं के बावजूद अस्पताल की खिड़कियों में अब तक सुरक्षा जाली नहीं लगाई गई है। यह सीधे तौर पर अस्पताल प्रशासन की लापरवाही और मरीजों की सुरक्षा के प्रति उसकी उदासीनता को दर्शाता है।
सौरव विष्णु ने सवाल उठाया कि आखिर इन आत्महत्या की घटनाओं के लिए जिम्मेदार कौन है? जब अस्पताल को सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने और मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त फंड मिलता है, तब उसका उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा? क्या प्रशासन किसी और बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है?
उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री यूनाइटेड फंड के उपयोग में हुई अनियमितताओं और अस्पताल में लगातार हो रही आत्महत्या की घटनाओं की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और अस्पताल में तत्काल सुरक्षा जाली, निगरानी व्यवस्था, दवाइयों की उपलब्धता तथा अन्य बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
सौरव विष्णु ने स्पष्ट किया कि वे इस गंभीर मुद्दे को जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और सरकार के समक्ष मजबूती से उठाएंगे। उन्होंने कहा कि मरीजों की सुरक्षा, सम्मानजनक इलाज और जनता के धन का पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। अब समय आ गया है कि एमजीएम अस्पताल की बदहाल व्यवस्था में व्यापक सुधार हो, ताकि जमशेदपुर की जनता को बेहतर और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
