रांची : झारखंड की राजधानी रांची से एक बेहद हैरान और विचलित कर देने वाला मामला सामने आया है। रांची के चर्चित निजी अस्पताल सेंटविटा (Centivita Hospital) पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगा है। झारखंड विधानसभा में कार्यरत कनीय सचिवालय सहायक अंजना तिवारी (36 वर्ष) की गॉलब्लैडर के एक सामान्य ऑपरेशन के बाद मौत हो गई। इस घटना से आक्रोशित विधानसभा कर्मियों और परिजनों ने शव को सड़क पर रखकर जोरदार प्रदर्शन और धरना शुरू कर दिया है।



🔹 सामान्य ऑपरेशन के लिए खुद चलकर आई थीं अस्पताल
परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, अंजना तिवारी को 24 मई 2026 को गॉलब्लैडर (पित्त की थैली) के सामान्य ऑपरेशन के लिए सेंटविटा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। भर्ती के वक्त वे पूरी तरह स्वस्थ थीं और खुद चलकर अस्पताल पहुंची थीं। उनकी सभी शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट्स भी बिल्कुल नॉर्मल थीं।
🔹 ‘ऑपरेशन थियेटर में कटी आर्टरी, चढ़ाना पड़ा 8 यूनिट ब्लड’
परिजनों ने डॉक्टरों पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सर्जरी के दौरान डॉक्टरों की लापरवाही से आर्टरी पंक्चर (रक्तवाहिनी कट) हो गई, जिससे शरीर के अंदर अत्यधिक ब्लीडिंग (रक्तस्राव) होने लगा। स्थिति को छुपाने और संभालने के लिए मरीज को आनन-फानन में 8 यूनिट रक्त और 2 यूनिट प्लाज्मा चढ़ाया गया। परिजनों का सवाल है कि एक सामान्य गॉलब्लैडर सर्जरी में इतनी भारी मात्रा में खून चढ़ाने की नौबत क्यों आई? इसके साथ ही मरीज को ठंडा रक्त चढ़ाने और ‘मल्टीपल ऑर्गन फेलियर’ की स्थिति पैदा करने का भी आरोप है।
🔹 हालत बिगड़ने पर किया रेफर, तोड़ा दम
जब मरीज की स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई, तो सेंटविटा प्रबंधन ने उन्हें 24 मई की रात को ही भगवान महावीर अस्पताल रेफर कर दिया। वहां वेंटिलेटर और डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद 26 मई 2026 की सुबह करीब 9 बजे अंजना तिवारी ने दम तोड़ दिया।
🔹 16 साल की बेटी के सिर से उठा मां का साया, सहकर्मियों में भारी आक्रोश
दिवंगत अंजना तिवारी विधवा थीं और परिवार में उनकी एकमात्र 16 वर्षीय बेटी है, जो अब इस दुनिया में बिल्कुल अकेली हो गई है। इस घटना के बाद झारखंड विधानसभा के कर्मचारियों में भारी उबाल है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि :
इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच के लिए विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन हो। दोषी डॉक्टरों और सेंटविटा अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। इस संवेदनशील मामले पर फिलहाल प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग या सेंटविटा अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।



