जमशेदपुर : टाटा लीज नवीकरण (Lease Renewal) की प्रक्रियाओं के बीच स्थानीय विस्थापितों और मूलवासियों की मांगें एक बार फिर तेज हो गई हैं। शुक्रवार को ‘झारखंड मूलवासी अधिकार मंच’ के बैनर तले सैकड़ों की संख्या में विस्थापित और स्थानीय ग्रामीण जिला उपायुक्त (DC) कार्यालय पहुंचे। मंच ने साफ शब्दों में मांग की है कि टाटा कंपनी की लीज का दोबारा नवीकरण करने से पहले 18 मौजा के विस्थापित परिवारों को स्थायी नौकरी और उचित मुआवजा सुनिश्चित किया जाए।



“पहले हक, फिर लीज” का नारा
डीसी कार्यालय परिसर में प्रदर्शन करते हुए संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि दशकों पहले टाटा प्रबंधन और उद्योगों के लिए 18 मौजा (राजस्व गांवों) के ग्रामीणों की जमीनें अधिग्रहित की गई थीं। उस वक्त कई वादे किए गए थे, लेकिन आज भी विस्थापितों की एक बड़ी आबादी बुनियादी हक, रोजगार और पुनर्वास के लिए संघर्ष कर रही है। मंच का कहना है कि जब तक इन विस्थापितों के भविष्य का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक लीज का नवीकरण नहीं किया जाना चाहिए।
ज्ञापन में की गई मुख्य मांगें :
- स्थायी रोजगार : 18 मौजा के अंतर्गत आने वाले सभी प्रभावित और विस्थापित परिवारों के कम से कम एक सदस्य को टाटा समूह या उसकी अनुषंगी कंपनियों में योग्यता के अनुसार नौकरी दी जाए।
- पुनर्वास की समीक्षा : विस्थापित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं जैसे शुद्ध पेयजल, पक्की सड़कें, बिजली और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ प्रबंधन द्वारा उपलब्ध कराई जाएं।
- स्थानीय को प्राथमिकता : कंपनियों में होने वाली ठेका और स्थायी नियुक्तियों में स्थानीय मूलवासियों को प्राथमिकता मिले।
प्रशासन का रुख
झारखंड मूलवासी अधिकार मंच के प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त के माध्यम से सरकार और टाटा प्रबंधन को एक मांग पत्र (ज्ञापन) सौंपा। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन और प्रबंधन ने इस विषय पर गंभीरता से विचार नहीं किया और विस्थापितों को उनके हक से वंचित रखा गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।



