लोकतंत्र सवेरा : बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की करारी हार के बाद लालू प्रसाद यादव के परिवार में मानो राजनीतिक ‘महाभारत’ छिड़ गया है। हार का झटका सिर्फ गठबंधन के नेताओं को नहीं लगा, बल्कि इसका सीधा असर लालू यादव के परिवारिक समीकरणों पर भी दिखाई देने लगा है। इसी बीच बड़ी खबर आई है कि लालू-राबड़ी की बेटी रोहिणी आचार्य ने राजनीति और परिवार दोनों से दूरी बनाने का ऐलान कर दिया है।
करारी हार के बाद बढ़ा तनाव……
चुनावी परिणामों ने राजद खेमे को गहरे सदमे में डाल दिया। पार्टी को उम्मीद के विपरीत सीटें मिलीं, और इसी के बाद से परिवार के अंदर मतभेद की खबरें जोर पकड़ने लगीं। बताया जा रहा है कि लगातार दो चुनावों में उम्मीदों के टूटने से पार्टी में नेतृत्व को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
रोहिणी आचार्य, जो सोशल मीडिया पर पार्टी की मुखर समर्थक रही हैं, हार के बाद अचानक खामोश हो गईं। फिर देर रात उन्होंने एक पोस्ट कर सभी को चौंका दिया —
“मैं अब राजनीति और परिवारिक विवादों से दूर जा रही हूँ।”
परिवार में किस बात को लेकर मतभेद….?
सूत्रों के अनुसार महागठबंधन की हार के बाद राजद परिवार में यह चर्चा तेज थी कि फैसले कौन ले रहा है और गलतियों की जिम्मेदारी कौन लेगा। कई फैसलों को लेकर परिवार के भीतर असहमति की बातें सामने आई हैं। तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर पहले भी सवाल उठते रहे थे, और अब हार के बाद असंतोष और गहरा गया है। रोहिणी आचार्य का यह कदम इस बात का संकेत माना जा रहा है कि परिवार में सभी विचार एक नहीं हैं।
रोहिणी की अलग पहचान…..
रोहिणी पेशे से डॉक्टर हैं और उनका राजनीतिक दखल सीमित रहा, लेकिन वे हमेशा पिता लालू यादव और भाई तेजस्वी के समर्थन में खुलकर ट्वीट करती रही हैं।
पारिवारिक एकता और राजनीतिक दिशा दोनों पर वे कई बार अपनी राय रख चुकी हैं। लेकिन अब उन्होंने खुद को पूरी तरह अलग करने की बात कह दी है।
सियासत में बड़ी गूंज – क्या ये संकेत है?
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी हार के बाद राजद परिवार में यह विवाद आगे और गहरा सकता है। रोहिणी की दूरी बनाना सिर्फ व्यक्तिगत फैसला नहीं, बल्कि यह राजद की आंतरिक स्थिति को भी उजागर करता है। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी कहना है कि—
- पार्टी में निर्णय प्रक्रिया को लेकर नाराज़गी है।
- तेजस्वी के नेतृत्व पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
- पुराने और नए नेताओं के बीच तालमेल की कमी है।
- रोहिणी का राजनीति से हटना इस असंतोष की एक बड़ी मिसाल मानी जा रही है।
अब आगे क्या?
हालांकि लालू परिवार की तरफ से आधिकारिक बयान नहीं आया, लेकिन यह तय है कि आने वाले दिनों में राजनीति और परिवार दोनों में हलचल बढ़ने वाली है।
राजद के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण है… हार की समीक्षा, नेतृत्व को लेकर चर्चा और अब परिवारिक विवाद, इन तीनों मोर्चों पर पार्टी को जल्द निर्णय लेना होगा।
संजय यादव और रमीज के पक्ष से अब तक क्या बयान आए हैं…..
संजय यादव और रमीज नेमत खान के पक्ष से अब तक स्पष्ट रूप से कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान नहीं आया है। हालांकि संजय यादव राजद के राज्यसभा सांसद और तेजस्वी यादव के खासमखास माने जाते हैं, जबकि रमीज नेमत खान तेजस्वी यादव की सोशल मीडिया टीम और प्रचार प्रसार की मॉनिटरिंग करते हैं। रमीज पर हत्या, हिंसा और बलवा जैसे गंभीर आरोप भी लगे हैं, जिनके चलते वे जेल भी जा चुके हैं। रोहिणी आचार्य ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में संजय यादव और रमीज को अपने दूरी बनाने और परिवार से बाहर करने का जिम्मेदार बताया है, लेकिन इनके पक्ष में अब तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला है। तेज प्रताप यादव भी अपने बयानों में संजय यादव को लालू परिवार की कलह का मुख्य कारण बताते रहे हैं, लेकिन संजय यादव या रमीज की ओर से सार्वजनिक तौर पर इन आरोपों पर कोई स्पष्ट सफाई या जवाब नहीं आया है। इस स्थिति में दोनों पक्षों के बीच तनाव बरकरार है और इस विवाद का राजनीतिक और पारिवारिक असर गहरा दिखाई दे रहा है।
