उत्तर प्रदेश : सपा नेता आजम खान 23 माह बाद आज जेल से रिहा हो सकते है। इससे उनके समर्थकों में खुशी की लहर है। हालांकि उन पर दर्ज 97 में से अभी कुछ में ही कोर्ट में सुनवाई पूरी हो सकी है। वहीं आजम खां के अब नए सियासी सफर पर कानाफूंसी होने लगी है। दरअसल लोकसभा चुनाव के दौरान टिकट बंटवारे को लेकर सपा मुखिया अखिलेश यादव और आजम खां में तल्खी बढ़ गई थी। इसके अलावा उनकी बेगम डॉ. तजीन फात्मा की बसपा प्रमुख मायावती से मुलाकात के बाद कयास लगाए जा रहे है कि वह बसपा के साथ आगामी चुनाव में सकते है। बता दें इससे पहले चंद्रशेखर ने जेल में आजम खां से मुलाकात करके अनुसूचित जाति और मुस्किल गठजोड़ को हवा दी थी।

सपा नेता आजम खां पर विभिन्न मामलों में 96 केस दर्ज हैं। 18 सितंबर को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद से ही आजम की रिहाई की उम्मीदें परवान चढ़ने लगीं। इसके साथ ही बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती और तजीन फात्मा की मुलाकात पिछले दिनों दिल्ली में हुई थी। सूत्रों के अनुसार दोनों की मुलाकात में वार्ता के केंद्र बिंदु में आजम खां ही रहे। सियासी जानकार इस मुलाकात को आजम खां-तजीन फात्मा के पिछले बयानों से जोड़कर देख रहे हैं। जो बताते हैं कि दोनों का मिलना इत्तेफाक नहीं है।
वहीं सपा ने इस हवा को नकारा…..
आजम खान के सपा में जाने की कयासबाजी को सपा मुखिया ने हंसकर टाल दिया। इसके साथ ही सपा के सूत्रों का कहना है कि आजम खां के लिए सपा से मुफिद को दूसरा राजनीतिक दल नहीं हो सकता । इससे पहले सीतापुर जेल में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद ने आजम खां से मुलाकात कर दलित-मुस्लिम गठजोड़ की सियासत को हवा दी थी। राजनीतिक जानकारों का यह भी मानना है कि आजम का अगला कदम उनके स्वास्थ्य और परिवार की राजनीतिक रणनीति पर निर्भर करेगा।
लोकसभा चुनाव में आई थी खटास….
लोकसभा चुनाव में टिकटों के बंटवारे को लेकर अखिलेश यादव और आजम खान के रिश्तों में तल्खी आ गई थी। खुद के चुनाव नहीं लड़ने की स्थिति में आजम खां ने अखिलेश यादव को रामपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का सुझाव दिया था। साथ ही मुरादाबाद सीट से बिजनौर की पूर्व विधायक रुचिवीरा को प्रत्याशी बनाने की सिफारिश की थी। अखिलेश ने रामपुर सीट से चुनाव लड़ने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। इसके बाद आजम खां के हवाले से रामपुर के सपा नेताओं ने लोकसभा चुनाव के बहिष्कार का एलान कर दिया था। इस खींचतान के बीच अखिलेश यादव ने आजम की पसंद को दरकिनार कर मौलाना मोहिब्बुल्लाह नदवी को रामपुर से उम्मीदवार घोषित कर दिया था। वहीं पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन का कहना है कि आजम खां सपा के संस्थापक सदस्य रहे हैं। उनके किसी भी पार्टी में जाने की चर्चाएं पूरी तरह से निराधार हैं। उनके किसी भी पारिवारिक सदस्य की किसी भी नेता से मुलाकात की तस्वीर नहीं आई है। आजम खां सपा में हैं और सपा में ही रहेंगे।
