लोकतंत्र सवेरा : छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश बॉर्डर के मारेदुमिल्ली जंगल में, सुरक्षाबलों ने कुख्यात नक्सली कमांडर और एक करोड़ के इनामी माड़वी हिड़मा को मुठभेड़ में मार गिराया। हिड़मा बीते दो दशकों में देश के सबसे बड़े, खूंखार और रणनीतिक नक्सली मास्टरमाइंड्स में गिना जाता था, जिस पर 1 करोड़ रुपये से अधिक का इनाम था और वह 26 से ज्यादा बड़े हमलों का मुख्य साजिशकर्ता था।
कौन था हिड़मा?…..
- हिड़मा, बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों का सबसे बड़ा नाम और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी मेंबर था।
- वह पीपल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी की बटालियन नंबर-1 का कमांडर और सेंट्रल कमेटी का सबसे युवा सदस्य था।
- 17 साल की उम्र से नक्सल आंदोलन से जुड़कर 2025 तक लगातार नक्सली गतिविधियों की कमान संभाले रहा।
- उसके नेतृत्व और रणनीतियों ने कई नक्सली हमलों को अंजाम दिया और संगठन को मजबूत किया।
कौन-कौन से बड़े हमले हिड़मा के नाम?…
- 2010 में दंतेवाड़ा में ताड़मेटला हमला, जिसमें 76 CRPF जवान शहीद हुए।
- 2013 में झीरम घाटी हमला, जिसमें कांग्रेसी नेताओं समेत 27 लोग मारे गए।
- 2017 में बुरकापाल हमला, जिसमें 24 जवान मारे गए।
- 2021 में सुकमा-बीजापुर हमला, जिसमें 22 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए।
- ऐसे कुल 26 से ज्यादा बड़े हमलों का मास्टरमाइंड हिड़मा रहा।
एनकाउंटर कैसे हुआ….?
- जानकारी के मुताबिक, सुरक्षाबलों ने खुफिया सूचना के आधार पर ऑपरेशन लॉन्च किया।
- हिड़मा अपनी पत्नी और चार साथियों के साथ आंध्र प्रदेश के मारेदुमिल्ली के जंगल में छिपा था।
- मुठभेड़ में हिड़मा सहित छह नक्सली ढेर हुए, इनमें उसकी पत्नी भी शामिल थी।
- एनकाउंटर के बाद सुरक्षाबलों ने पूरी पुष्टि की कि मारे गए लोगों में हिड़मा भी है।
संगठन में प्रभाव और कार्यशैली…..
- हिड़मा हमला ही नहीं करवाता था, बल्कि रणनीति बनाने, निगरानी, कैडर की ट्रेनिंग और फंडिंग में भी अहम भूमिका निभाता था।
- बहुत सुव्यवस्थित तरीके से अपने गुट को चलाता था और सैकड़ों हथियारबंद सदस्यों की कमान उसके पास रहती थी।
- स्थानीय ग्रामीणों और कैडर के बीच उसकी गहरी पकड़ थी और निगरानी तंत्र बेहद मजबूत था।
मुठभेड़ का महत्व….
- सुरक्षा एजेंसियों के लिए हिड़मा का मारा जाना ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि वह लंबे समय से पकड़ से बाहर था।
- इसे नक्सल नेटवर्क के लिए बड़ा झटका और लाल आतंक की रीढ़ तोड़ने जैसे घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।
इस प्रकार, हिड़मा के मारे जाने को नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक जीत और सुरक्षा बलों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
