नई दिल्ली : देश में आज से LPG सिलेंडर की नई कीमतें लागू हो गई हैं। इस महीने कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर उपभोक्ताओं को मामूली राहत दी गई है, जबकि घरेलू सिलेंडर की कीमतों में कोई संशोधन नहीं किया गया है। इंडियन ऑयल द्वारा जारी ताज़ा रेट के अनुसार, 19 किलो वाले कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम दिल्ली से पटना तक 10 रुपये तक कम किए गए हैं। इसके विपरीत, 14.2 किलो घरेलू LPG सिलेंडर के दाम पहले जैसे ही बने हुए हैं।
कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के नए रेट…..
कॉमर्शियल एलपीजी की संशोधित कीमतें आज से प्रभावी हैं। दिल्ली में 19 किलो वाला कॉमर्शियल सिलेंडर अब 1590.50 रुपये की जगह 1580.50 रुपये में उपलब्ध है। कोलकाता में इसे 1684 रुपये में खरीदा जा सकेगा, जबकि पहले इसका मूल्य 1694 रुपये था। मुंबई में नई कीमत 1531.50 रुपये तय की गई है, जो पिछली दर 1542 रुपये से 10 रुपये कम है। वहीं चेन्नई में अब यह सिलेंडर 1739.50 रुपये में मिलेगा, जो पहले 1750 रुपये था। इन दरों में कटौती से होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं को सीमित, लेकिन सीधी राहत मिलेगी, क्योंकि कॉमर्शियल LPG का उपयोग मुख्यतः व्यावसायिक प्रतिष्ठान करते हैं।
घरेलू एलपीजी सिलेंडर के रेट स्थिर….
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए इस महीने किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की कीमतें देशभर में स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली में इसकी कीमत 853 रुपये है, जबकि मुंबई में 852.50 रुपये में यह सिलेंडर उपलब्ध है। कोलकाता में इसकी कीमत 879 रुपये और चेन्नई में 868.50 रुपये निर्धारित है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में घरेलू सिलेंडर 890.50 रुपये में उपलब्ध है। बिहार के पटना में यह सिलेंडर 951 रुपये में मिलता है। इसके अलावा उत्तराखंड के बागेश्वर में इसकी कीमत 890.5 रुपये और जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 969 रुपये है। इन दरों में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं होने से घरेलू ग्राहकों को पूर्ववत मूल्य पर सिलेंडर मिलता रहेगा।
राज्य-दर-राज्य एलपीजी कीमतों में अंतर की वजह….
भारत में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में राज्य के अनुसार अंतर देखा जाता है, जिसकी मूल वजह स्टेट टैक्स की संरचना और लॉजिस्टिक लागत में भिन्नता है। हर राज्य का वैट (वैल्यू एडेड टैक्स) अलग होता है, जिसके कारण अंतिम कीमतें बदल जाती हैं। रिफाइनरी या गैस डिपो से दूरस्थ, पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों तक गैस पहुंचाने में अतिरिक्त खर्च होता है, जिससे उन क्षेत्रों में कीमतें बढ़ जाती हैं।
