रांची: झारखंड हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि दो वयस्क लंबे समय तक अपनी सहमति से रिश्ते में रहे हों, तो बाद में किसी कारणवश शादी नहीं होने मात्र से हर मामला स्वतः दुष्कर्म (रेप) का नहीं बन जाता। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल शादी का वादा पूरा नहीं होने के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (पूर्व में आईपीसी) की दुष्कर्म संबंधी धाराएं स्वतः लागू नहीं हो सकतीं।

हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में यह देखना आवश्यक है कि क्या शुरुआत से ही आरोपी का शादी करने का कोई इरादा नहीं था और उसने केवल शारीरिक संबंध बनाने के उद्देश्य से झूठा वादा किया था। यदि दोनों पक्ष लंबे समय तक स्वेच्छा से संबंध में रहे और बाद में किसी कारण से विवाह नहीं हो सका, तो मात्र इस आधार पर दुष्कर्म का अपराध सिद्ध नहीं माना जा सकता।
अदालत ने मामले के तथ्यों का विश्लेषण करते हुए पाया कि दोनों पक्ष कई वर्षों तक सहमति से संबंध में थे। ऐसे में इसे केवल विवाह न होने के कारण दुष्कर्म का मामला मानना उचित नहीं होगा। इसी आधार पर हाई कोर्ट ने आरोपी को राहत प्रदान करते हुए निचली अदालत के निर्णय को निरस्त कर दिया।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी मामले में यह साबित हो जाए कि विवाह का वादा शुरू से ही धोखाधड़ीपूर्ण था और उसी के आधार पर सहमति प्राप्त कर शारीरिक संबंध बनाए गए, तो ऐसे मामलों में दुष्कर्म का अपराध बन सकता है। इसलिए प्रत्येक मामले का निर्णय उसके तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।
