रांची/जमशेदपुर : झारखंड में प्रस्तावित खनन पट्टा (माइनिंग लीज) से जुड़ी जानकारी को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत दायर एक आवेदन में रांची जिले के तमाड़ अंचल में प्रस्तावित पत्थर खनन पट्टा से संबंधित अहम दस्तावेज और स्वीकृतियों की जानकारी मांगी गई है।

यह आवेदन जमशेदपुर निवासी नारायण लाल द्वारा दायर किया गया है। आवेदन को रांची उपायुक्त कार्यालय ने आवश्यक कार्रवाई के लिए जिला खनन पदाधिकारी को अग्रसारित कर दिया है। हालांकि आवेदन दिए जाने के करीब दो से तीन माह बीत जाने के बाद भी अब तक कोई स्पष्ट जवाब उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिससे पूरे मामले में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
खनन लीज से जुड़े दस्तावेजों की मांगी गई जानकारी…….
RTI आवेदन में रांची जिले के तमाड़ अंचल के मौजा पेडाईडीह और खुर्चुडी क्षेत्र में प्रस्तावित पत्थर खनन पट्टा से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेजों और स्वीकृतियों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
आवेदन में विशेष रूप से पत्रांक 193/M दिनांक 06 फरवरी 2025 और पत्रांक 270/M दिनांक 17 फरवरी 2024 के तहत जारी Letter of Intent (LOI) से जुड़ी पूरी फाइल की जानकारी मांगी गई है। इसमें फाइल नोटशीट, जांच रिपोर्ट, अनुशंसा, आदेश तथा अन्य प्रशासनिक अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।
फाइल की वर्तमान स्थिति पर भी मांगा गया जवाब……
RTI में यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि इन दोनों फाइलों की वर्तमान स्थिति क्या है। क्या संबंधित खनन पट्टा को अंतिम स्वीकृति दे दी गई है या मामला अब भी लंबित है। यदि मामला लंबित है तो वह किस विभाग या किस स्तर पर लंबित है, इसकी भी स्पष्ट जानकारी देने की मांग की गई है।
पर्यावरण और सरकारी स्वीकृतियों पर भी सवाल…..
आवेदन में यह भी पूछा गया है कि प्रस्तावित खनन लीज के लिए राज्य सरकार, खान आयुक्त, पर्यावरण विभाग या State Environment Impact Assessment Authority (SEIAA) से किसी प्रकार की स्वीकृति या अनापत्ति प्राप्त की गई है या नहीं। यदि इस संबंध में कोई अनुमति या एनओसी जारी की गई है तो उसकी प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया गया है।
CNT एक्ट के प्रावधानों को लेकर भी उठे सवाल…….
RTI आवेदन में Chotanagpur Tenancy Act, 1908 के तहत आने वाली धारा 240, 241 और 242 का भी उल्लेख किया गया है। इसमें पूछा गया है कि मुंडारी खुंटकट्टी या गैरमजरुआ खास भूमि पर खनन पट्टा या LOI जारी करने की वैधानिकता किस अधिनियम, नियम या अधिसूचना के तहत संभव है।
आवेदक का कहना है कि यदि इस प्रकार की भूमि पर खनन पट्टा जारी किया गया है, तो उसके लिए लागू कानूनी प्रावधानों की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
निर्धारित समय बीतने के बाद भी नहीं मिला जवाब……
सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत निर्धारित 10 रुपये का पोस्टल ऑर्डर शुल्क भी आवेदन के साथ जमा किया गया है। इसके बावजूद आवेदन दिए जाने के लगभग तीन महीने बीत जाने के बाद भी संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक जवाब उपलब्ध नहीं कराया गया है।
सूचना उपलब्ध कराने में हो रही देरी को लेकर अब खनन प्रक्रिया और प्रशासनिक निर्णयों की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर इस प्रस्तावित खनन गतिविधि और उससे जुड़े प्रशासनिक पहलुओं को लेकर चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
