जमशेदपुर/लोकतंत्र सवेरा : गोलमुरी थाना क्षेत्र से एक ऐसी कहानी सामने आ रही है, जो सिर्फ चोरी की नहीं—बल्कि सिस्टम की कमजोरी, लापरवाही और कथित मिलीभगत की भी है। आरोप है कि यहां स्थित एक केबल कंपनी में वर्षों से सुनियोजित तरीके से चोरी का खेल चलता आ रहा है, और हैरानी की बात यह है कि सब कुछ ‘जानकर भी अनजान’ बना हुआ है।

“चोरों से नहीं, अब पहरेदारों से डर लगता है, जब घर ही सुरक्षित ना हो, तो बाहर क्या लगता है…”
स्थानीय सूत्रों की मानें तो यह कोई नई बात नहीं है। जैसे ही कोई नया थाना प्रभारी आता है, शुरुआत में कुछ दिन सख्ती का माहौल बनता है, लेकिन धीरे-धीरे वही पुराना खेल फिर चालू हो जाता है। बीच-बीच में खानापूर्ति के तौर पर छापेमारी, गिरफ्तारियां और दिखावटी कार्रवाई होती है—और फिर अगले ही दिन से चोरी का सिलसिला दोबारा शुरू।
“हर बार कहानी वही, किरदार वही, अंजाम वही, बस चेहरे बदलते रहते हैं, लेकिन काम वही…”
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी स्तर पर हो रही चोरी की गतिविधियों की भनक न पुलिस को लगती है, न कंपनी के सुरक्षा गार्ड्स को? या फिर सच कुछ और ही है…?
सूत्र साफ इशारा करते हैं कि यह कोई साधारण चोरी नहीं, बल्कि एक ‘सेटिंग वाला खेल’ है—जहां सब कुछ पहले से तय रहता है। कब चोरी होगी, कैसे होगी, कौन पकड़ा जाएगा और कौन बचाया जाएगा—सबका रोडमैप पहले से तैयार रहता है।
“सच दबाया जा सकता है, मिटाया नहीं जाता, और जब आवाज उठती है, तो सन्नाटा भी बोल जाता…”
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है……
👉 क्या यह केवल वर्षों की लापरवाही है?
👉 या फिर पुलिस, सुरक्षा तंत्र और कथित राजनीतिक संरक्षण की मिलीभगत?
इस पूरे मामले ने न सिर्फ पुलिस प्रशासन बल्कि कंपनी के सुरक्षा सिस्टम पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखने वाली बात होगी कि क्या इस बार भी मामला सिर्फ ‘दिखावे की कार्रवाई’ बनकर रह जाएगा, या फिर सच में इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होगा।
“इंसाफ की राह में चाहे देर ही क्यों ना हो, लेकिन जब सच सामने आता है, तो अंधेरा भी रोशनी में बदल जाता है…”
