जमशेदपुर : सिदगोड़ा थाना क्षेत्र के आकाशदीप प्लाजा के पास एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने हर गुजरने वाले को ठिठकने पर मजबूर कर दिया। वर्षों से खड़ा एक विशालकाय, हरा-भरा पेड़—जो ना जाने कितनी धूप-बारिश झेलकर लोगों को छांव देता रहा—उसे अचानक काट दिया गया। अब सवाल उठ रहा है… आखिर किसके आदेश पर? और क्यों?


“मैं तो बस छांव देता था… मेरा कसूर क्या था?”……
स्थानीय लोगों की आंखों में गुस्सा भी है और दर्द भी।
जिस पेड़ के नीचे लोग आराम करते थे, बच्चे खेलते थे, राहगीर सुस्ताते थे—आज वही पेड़ जमीन पर गिरा पड़ा है।
👉 जैसे पेड़ खुद पूछ रहा हो: “मैंने किसका रास्ता रोका था…? मैं तो बस थके लोगों को सुकून देता था…”
बिना सूचना, बिना जवाबदेही!
सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि पेड़ काटने को लेकर कोई स्पष्ट सूचना नहीं, ना ही किसी विभाग की जिम्मेदारी सामने आई लोगों का आरोप है कि बिना अनुमति के इतनी बड़ी कार्रवाई कैसे हो गई?
पेड़ की खामोश पुकार……
“जब शहर को सांस चाहिए थी… तब मुझे ही क्यों काट दिया?”
लोगों में आक्रोश…….
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराज़गी देखी जा रही है।
कई लोगों ने इसे पर्यावरण के साथ खिलवाड़ बताया है।
एक बुजुर्ग की आवाज़……
“ये सिर्फ पेड़ नहीं था, ये हमारी यादें थी… हमारी पहचान थी।”
पेड़ का दर्द भरा डायलॉग…..
“तुम्हारी गर्मी में ठंडक बनता रहा… आज तुम्हारे फैसले में ही जल गया…”
बड़ा सवाल… विकास या विनाश ?…..
क्या शहर के विकास के नाम पर हरियाली की बलि चढ़ती रहेगी ? या फिर जिम्मेदार लोगों से जवाब मांगा जाएगा?
👉 पेड़ की आखिरी पुकार:
“अगर मैं नहीं रहूंगा… तो तुम्हारी सांसें भी अधूरी हो जाएंगी…”अब देखने वाली बात ये होगी कि प्रशासन इस पूरे मामले पर क्या कार्रवाई करता है और क्या इस ‘हरे कत्ल’ के पीछे के जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।
