जमशेदपुर : हिंदू नववर्ष के अवसर पर निकाले गए जुलूस को लेकर शहर में एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। जहां एक ओर यह पर्व श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक उत्सव का प्रतीक माना जाता है, वहीं दूसरी ओर कुछ स्थानों पर हुड़दंग और अव्यवस्था की शिकायतों ने पूरे आयोजन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जुलूस के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने माहौल को बिगाड़ने का प्रयास किया। डीजे की तेज आवाज, सड़क पर हंगामा और कथित रूप से अनुशासनहीन व्यवहार के कारण आम नागरिकों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा।
लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल पर्व की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि समाज में भय और असुरक्षा का माहौल भी पैदा करती हैं। खासकर महिलाओं और परिवारों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है।
सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों ने इस मामले में प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि धार्मिक आयोजनों में शामिल होने वाले लोगों की पहचान सुनिश्चित की जाए और हुड़दंग करने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
सवाल……
क्या आस्था के नाम पर अराजकता को नजरअंदाज किया जा सकता है?
क्या धार्मिक आयोजनों में अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेदारी तय नहीं होनी चाहिए?
हिंदू नववर्ष केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का प्रतीक है। ऐसे में इसकी गरिमा बनाए रखना समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है। समय रहते ठोस कदम उठाए गए, तो ही भविष्य में इस तरह के विवादों से बचा जा सकेगा।
