जमशेदपुर : टाटानगर रेलवे स्टेशन के वाशिंग लाइन में करंट लगने से झुलसे टेक्नीशियन आशीष माझी की मौत के बाद मंगलवार शाम स्टेशन परिसर में जमकर हंगामा हुआ। मृतक के परिजनों एवं स्थानीय लोगों ने आश्रित को नौकरी और उचित मुआवजा देने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। स्थिति तनावपूर्ण होने पर रेल पुलिस को हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को नियंत्रित करना पड़ा।



जानकारी के अनुसार पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव लेकर सीधे टाटानगर रेलवे स्टेशन पहुंचे और मृतक के परिवार के एक सदस्य को नौकरी तथा मुआवजा देने की मांग पर अड़ गए। स्टेशन के समीप शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने रेलवे प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मांगों को शीघ्र पूरा करने की मांग की।
मौके पर मौजूद रेल पुलिस एवं अधिकारियों ने लोगों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर डटे रहे। इस दौरान कुछ लोग शव लेकर स्टेशन परिसर के भीतर जाने का प्रयास करने लगे, जिसे रेल पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए रेल पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई। घटना के दौरान यात्रियों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। लाठीचार्ज के बाद भी परिजन और स्थानीय लोग स्टेशन परिसर के पास धरने पर बैठे रहे।
बताया जाता है कि पोस्टमार्टम से पूर्व भी परिजनों ने टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) परिसर में विरोध प्रदर्शन किया था। शाम करीब पांच बजे पोस्टमार्टम के बाद शव लेकर परिजन स्टेशन पहुंचे, जहां विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया।
30 मई को हुआ था हादसा…..
मृतक आशीष माझी 30 मई को वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की मरम्मत के दौरान करंट की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गया था। घटना के बाद उसे पहले सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां से बेहतर इलाज के लिए टीएमएच रेफर किया गया। अस्पताल में उसकी स्थिति लगातार गंभीर बनी रही और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। करीब एक सप्ताह तक जिंदगी और मौत से संघर्ष करने के बाद शनिवार रात उसकी मौत हो गई। आशीष माझी अविवाहित था तथा दो भाइयों में बड़ा था।
तीन माह में करंट से तीन मौतें…..
टाटानगर रेलवे स्टेशन परिसर में पिछले तीन महीनों के दौरान हाईटेंशन तार की चपेट में आने से तीन लोगों की मौत हो चुकी है। 3 अप्रैल को सोनू पात्र नामक युवक स्टेशन पर खड़ी मालगाड़ी के ऊपर चढ़ गया था, जहां हाईटेंशन तार की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई थी। इसके बाद 6 मई को रंजीत कुमार जेना नामक युवक भी मालगाड़ी पर चढ़ने के दौरान करंट लगने से जान गंवा बैठा था।
अब टेक्नीशियन आशीष माझी की मौत के बाद एक बार फिर रेलवे स्टेशन परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई तथा मृतक के परिवार को उचित सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।



