कर्नाटक के बीदर से एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ 48 वर्षीय संजुकुमार होसामनी का एक सामान्य-सा बाइक सफर
अचानक मौत के सफर में बदल गया।
बीदर जिले के तालमदगी ब्रिज के पास
जब संजुकुमार बंबुलागी गांव से हुमनाबाद की ओर जा रहे थे,
तभी सड़क पर पड़ी एक पतंग की नायलॉन मांझा
उनके गले में आ फंसी।
तेज़ रफ्तार बाइक…
और उससे भी तेज़ धार वाली डोर…
पल भर में मांझा गले को चीरती चली गई।
सड़क पर गिर पड़े संजुकुमार…
गले से बहता खून…
और दर्द से तड़पता एक पिता…
मौत से लड़ते हुए भी
उनका दिल अपनी बेटी के पास था।
खून से लथपथ हालत में
उन्होंने आखिरी बार फोन उठाया…
और बेटी से कहा —
“बेटी… मैं आ रहा हूँ…”…..
लेकिन यह शब्द…
उनकी ज़िंदगी की आखिरी आवाज़ बन गए।
कुछ ही पलों में
एक पिता हमेशा के लिए खामोश हो गया।
हादसे की खबर फैलते ही
परिजन और स्थानीय लोग सड़क पर उतर आए।
गुस्सा, आंसू और बेबसी…
हर चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी।
लोगों का साफ कहना है —…..
हर साल नायलॉन मांझा
कई घरों के चिराग बुझा देती है,
लेकिन प्रशासन अब तक
सख़्त कदम उठाने में नाकाम रहा है।
स्थानीय लोगों ने नायलॉन मांझा पर पूरी तरह प्रतिबंध, और आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने की मांग उठाई है।
आज सवाल सिर्फ संजुकुमार की मौत का नहीं है…
सवाल उस खूनी डोर का है
जो हर त्योहार, हर मौसम में
किसी न किसी परिवार की खुशियाँ काट देती है।
कब जागेगा सिस्टम?
कब रुकेगी यह जानलेवा मांझा?
क्योंकि अगर आज भी सख़्ती नहीं हुई…
तो कल फिर
किसी बेटी के फोन में
पिता की आखिरी आवाज़ गूंजेगी।
