लोकतंत्र सवेरा : आज के दौर में बीमारियां किसी सामाजिक या आर्थिक सीमा को नहीं जानतीं। शहर से लेकर गांव तक, अमीर से लेकर गरीब तक… हर कोई किसी न किसी बीमारी से जूझ रहा है या उसके डर में जी रहा है। अस्पतालों की बढ़ती कतारें और महंगी दवाएं इस हकीकत की गवाह हैं कि आधुनिक जीवनशैली ने हमें सुविधा तो दी है, लेकिन सेहत छीन ली है। पर क्या कभी आपने सोचा है कि इन बीमारियों से बचने का सबसे आसान, सस्ता और असरदार तरीका क्या हो सकता है? अमेरिका के मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. संजय भोजराज के मुताबिक, इसका जवाब किसी लैब या मेडिसिन बॉटल में नहीं, बल्कि हमारे रोजमर्रा के कदमों में छिपा है।
हरकत ही है असली हर इलाज…..
डॉ. भोजराज बताते हैं कि 80% से ज्यादा क्रॉनिक बीमारियां… जैसे हार्ट डिजीज, डायबिटीज, हाई बीपी और मानसिक तनाव—हमारी लाइफस्टाइल का नतीजा हैं। हम कैसे चलते हैं, क्या खाते हैं, कितनी नींद लेते हैं और तनाव को कैसे संभालते हैं—यही हमारे स्वास्थ्य की दिशा तय करते हैं। उनके अनुसार, “मूवमेंट सिर्फ जिम जाने या कठिन वर्कआउट करने का नाम नहीं है। यह कोई भी ऐसी गतिविधि है, जो शरीर और फेफड़ों को सक्रिय रखे। चाहे वह टहलना हो, बागवानी करना, सीढ़ियां चढ़ना या योग करना—हर छोटी हरकत शरीर को जीवंत रखती है।”
“मूवमेंट : शरीर की प्राकृतिक हीलिंग थेरेपी”
रिसर्च बताती हैं कि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और एरोबिक एक्सरसाइज करने वाले लोगों में हार्ट डिजीज, डायबिटीज और मानसिक बीमारियों का खतरा लगभग 50% तक घट जाता है। डॉ. भोजराज का कहना है… “यह एक ऐसा फायदा है, जो कोई दवा नहीं दे सकती। मूवमेंट शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीजन और सूरज की रोशनी से पोषित करता है, जिससे माइटोकॉन्ड्रिया एक्टिव होते हैं। यही ऊर्जा के असली स्रोत हैं, जो शरीर की मरम्मत प्रणाली को चलाते हैं।” उनके अनुसार, “जब शरीर चलता है, तो उसके भीतर की हीलिंग क्षमता जागती है। हर कदम, हर स्ट्रेच हमारे भीतर नई जिंदगी फूंक देता है।”
“हर दिन के 10,000 कदम – दिल की सुरक्षा कवच”…..
दिल की सेहत को ठीक रखने का सबसे आसान और असरदार तरीका है रोजाना चलना। डॉ. भोजराज कहते हैं, “रोज सिर्फ 20 से 30 मिनट की वॉक या करीब 10,000 कदम चलने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल होता है, ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है और दिल की धड़कनें संतुलित रहती हैं। इससे हार्ट डिजीज का खतरा लगभग 50% तक कम हो जाता है। और इसके लिए किसी महंगे जिम या उपकरण की जरूरत नहीं है।”
“किसी भी उम्र में, किसी भी तरीके से”…..
मूवमेंट की खूबसूरती यह है कि यह किसी उम्र या फिटनेस लेवल तक सीमित नहीं है। तेज चलना, योग, साइकिलिंग, तैराकी या हल्की कसरत… जो भी आपके लिए सहज हो, वही करें। फर्क सिर्फ निरंतरता का है। डॉ. भोजराज कहते हैं, “स्वस्थ उम्र की शुरुआत दवा से नहीं, बल्कि शरीर की हरकत से होती है। यह कोई फिटनेस ट्रेंड नहीं, बल्कि शरीर की प्राकृतिक जरूरत है।”
लंबी उम्र का राज – आपके अपने कदमों में”….
वास्तव में, आधुनिक चिकित्सा ने हमें इलाज दिए हैं, लेकिन रोकथाम का असली रहस्य अभी भी हमारे जीवन के छोटे-छोटे फैसलों में छिपा है। डॉ. भोजराज के शब्दों में “लंबी उम्र और स्वस्थ जीवन का राज किसी दवा में नहीं, बल्कि आपकी रोजमर्रा की हलचल में है। अपने शरीर को चलाइए, यह खुद आपकी रक्षा करेगा।”
अगर आप चाहते हैं कि आपका दिल मजबूत रहे, दिमाग शांत रहे और उम्र लंबी हो—तो शुरुआत किसी दवा की शीशी से नहीं, बल्कि अपने कदमों से करें। रोज थोड़ा चलिए, सांस गहराई से लीजिए, और अपने शरीर को उसकी प्राकृतिक लय में जीने दीजिए। क्योंकि सेहत का असली रहस्य आपके मूवमेंट में छिपा है, न कि मेडिसिन में।
