झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को गुरुवार को ऐतिहासिक सफलता मिलने जा रही है। भाकपा माओवादी संगठन के ईस्टर्न रीजनल ब्यूरो के मुख्यालय माने जाने वाले सारंडा इलाके में दो दशक से सक्रिय उग्रवादियों की सबसे बड़ी टुकड़ी आज पुलिस मुख्यालय में डीजीपी तदाशा मिश्रा के समक्ष आत्मसमर्पण करेगी. जानकारी के अनुसार, एक करोड़ के इनामी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा के दस्ते में अब तक की सबसे बड़ी सेंध लगी है। उसके कोर नेटवर्क से जुड़े कुल 25 सशस्त्र माओवादी मुख्यधारा में लौटने जा रहे हैं। इनमें छह सबजोनल कमांडर, छह एरिया कमांडर और 13 सशस्त्र कैडर शामिल हैं।



हथियारों का जखीरा भी होगा जमा……
सरेंडर के दौरान माओवादी भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी पुलिस के हवाले करेंगे। इनमें एक एलएमजी इंसास, चार इंसास राइफल, नौ एसएलआर, एक .303 बोल्ट राइफल, एक देसी पिस्टल, 27 मैगजीन, 2857 कारतूस और आठ वॉकी-टॉकी शामिल हैं. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, लगातार चल रहे ऑपरेशन और सुरक्षा बलों के दबाव ने माओवादी नेटवर्क की कमर तोड़ दी है। जंगलों में रसद, फंडिंग और नए कैडरों की भारी कमी के कारण संगठन बिखराव की स्थिति में पहुंच चुका है।
इन बड़े नक्सलियों ने डाले हथियार……
सरेंडर करने वालों में कई कुख्यात और इनामी उग्रवादी शामिल हैं।
एरिया कमांडर करण उर्फ डांगुर तियू पर 29 मामले दर्ज हैं और उस पर 2 लाख रुपये का इनाम घोषित है।
पांच लाख का इनामी गादी उर्फ गुलशन मुंडा रांची, खूंटी, सरायकेला और चाईबासा में 48 मामलों में वांछित है।
सबजोनल कमांडर नागेंद्र मुंडा पर 38 आपराधिक मामले दर्ज हैं।
पांच लाख की इनामी महिला उग्रवादी रेखा मुंडा उर्फ जयंती के खिलाफ 18 मामले दर्ज हैं।
सागेन आंगारिया पर अकेले चाईबासा जिले में 123 मामले दर्ज बताए जा रहे हैं. इसके अलावा दर्शन उर्फ बिंज हांसदा, सुलेमान हांसदा, बैजनाथ हांसदा, बासुमति जेराई, रघु कामय उर्फ गुणा, किशोर सिरका और रामदयाल मुंडा जैसे सक्रिय उग्रवादी भी सरेंडर सूची में शामिल हैं।
महिला कैडरों समेत कई हार्डकोर उग्रवादी मुख्यधारा में लौटे…..
सरेंडर करने वाले कैडरों में वंदना उर्फ शांति, सुनीता सरदार, डांगुर बोईपाई, बसंती देवगम, मुन्नी राम मुंडा, अनिशा कोडा, सपना उर्फ सुरू कालुडिया, सुसारी उर्फ दसमा कालुंडिया, बिरसा कोडा उर्फ हरिसिंह, नुअस, बुमली तियू, निति माई और लादू तिरिया जैसे नाम भी शामिल हैं। इन सभी के खिलाफ नक्सली गतिविधियों से जुड़े कई मामले दर्ज हैं।
मिसिर बेसरा का नेटवर्क बिखरने की कगार पर……
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, देशभर में भाकपा माओवादी संगठन का अब सिर्फ एक ही बड़ा चेहरा मिसिर बेसरा बचा है, लेकिन उसका नेटवर्क तेजी से कमजोर हो चुका है। उसके प्रोटेक्शन दस्ते के अधिकांश सदस्य या तो गिरफ्तार हो चुके हैं या आत्मसमर्पण कर चुके हैं. हाल ही में उसके करीबी सदस्य बेला सरदार उर्फ आशा की गिरफ्तारी हुई थी, जबकि तेलंगाना में टेक विश्वनाथ और उसकी पत्नी पूनम ने आत्मसमर्पण किया था। बंगाल में भी जोनल कमेटी सदस्य मधाई पात्रा ने हथियार छोड़ दिए थे।
झारखंड में खत्म हो रही नक्सलियों की पकड़…….
सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि झारखंड में अब भाकपा माओवादी समेत पीएलएफआई, टीपीसी और जेजेएमपी जैसे संगठन लगभग निष्क्रिय हो चुके हैं। जंगलों में न तो उन्हें स्थानीय समर्थन मिल रहा है और न ही बाहरी राज्यों से मदद. लगातार ऑपरेशन, गिरफ्तारी और सरेंडर के कारण संगठन में रणनीतिकार से लेकर हथियारबंद कैडरों तक की भारी कमी हो गई है। ऐसे में राज्य में नक्सलियों के दोबारा मजबूत होने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है।



